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योग दिवस पर खास......... योग और प्रबंधन की नायाब पैमाइश है अभिनेत्री हर्षदा पाटिल

योग दिवस पर खास.........


योग और प्रबंधन की नायाब पैमाइश है अभिनेत्री हर्षदा पाटिल



विजय शुक्ल


लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया


कहते है कि योग चित्त से शरीर का लगाव का सबसे सही माध्यम है।



आत्मा परमात्मा का मिलन जैसा ही अनुभव नयी ऊर्जा और स्फूर्ति के रूप मे योग से ही मिल सकता है। और जब मन चंगा तो कठौती मे गंगा वाली कहावत बिल्कुल हकीकत सी लगती है अगर कोई शक है तो अभिनेत्री हर्षदा पाटिल की मुस्कुराती काया से पूछ लो।



जो नाम की तरह ही सबको सुकून और एक अजीब सी पॉजिटिव ताकत का एहसास देती है। ऐसा नही है कि हर्षदा पाटिल ने एक दिन मे कायनात की खूबसूरती को अपने अन्दर समेट लिया हो बल्कि इसके पीछे उनके बचपन से आज तक का अपने पिता डॉ गोपालराव किशनराव पाटिल के साथ योगाभ्यास मे शामिल होना और खुद को योग मे निपुण बनाने से हुआ है।



वो अलग बात है कि बचपन मे हास्यासन पर खिलखिलाता हर्षदा का वो चुलबुला अंदाज प्रबंधन की पढाई लिखाई और पैडमैन, रंगीला राजा, मातृवेनम जैसी फिल्मो मे अक्षय कुमार व गोविंदा जैसे नामचीन अभिनेताओ के साथ अभिनय के दौरान रोजमर्रा की आदतो मे शुमार इस योग से दिन प्रतिदिन निखरता ही गया हो और शायद यही वजह है कि उनके अभिनय और अदाकारी मे श्रीदेवी, हेमामालिनी व शर्मिला टैगोर की झलक अपने आप दिख जाती है।



इनकी फिटनेस और इनका शान्त चित्त समय की कठिनाईयो से उबरने की इनकी अपनी क्षमता के पीछे की ताकत पिता के साथ योगाभ्यास जैसी अच्छी आदतो का नतीजा है और प्रबंधन की पढाई के साथ साथ एयर होस्टेस रह्ते हूए लोगो के प्रति उदार भाव और संयम का अनूठा उदाहरण भी।



वैसे तो हर्षदा की वाकपटुता और उनकी हाजिरजबाबी योग के साथ उनको बेह्तरीन अदाकारा बनाते है पर अच्छा इन्सान तो हर्षदा पाटिल का पारिवारिक परिवेश है। शायद यह लातूर की माटी का असर है जो हर्षदा पाटिल को समाज के हर सुख दुख मे उनको जोड़ देता है वो चाहे पैदल गाँव जाते वो मजदूर का मुद्दा हो या अवसाद का मुद्दा।



संयम और सधा हुआ तरीका तो उनके अन्दर की आवाज है और यही वो राज है जो हर्षदा के अभिनय का मुस्कुराता हिस्सा है बिल्कुल अलग सा जैसे बारिश की बूंदो से उठती हुई माटी की वो सोंधी महक।



अभिनय का यह लोहा दक्षिण से लेकर मराठी सिने दुनिया और मुम्बई की फिल्मी दुनिया के बीच हर्षदा पाटिल का योग से निखरे व चमकते किरदार के बदौलत हिट होना स्वाभाविक है। और उनकी हसीन और शालीन अदा के आगे बाकी सबका फीका होना भी क्योकि मन से तन के संयम का नायाब हीरा जो उनकी आदतो मे शुमार है।



हर्षदा पाटिल जैसी फिल्मी हस्ती और उनके अन्दर बसता यह योग भारत के परिपक्व व सुदृढ संस्कृति व परिवेश का जीता जागता पैमाना है।


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