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क्या आपको पता है कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया सहसों इलाहाबाद  शाखा में मोदी जी के आने से कई बरस पहले ही प्रचलन में आ गया था जनधन खाता 

क्या आपको पता है कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया सहसों इलाहाबाद  शाखा में मोदी जी के आने से कई बरस पहले ही प्रचलन में आ गया था जनधन खाता 



विजय शुक्ल 

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 

दिल्ली।जैसा की मोदी सरकार ने आने के बाद लगभग एक के बाद एक सरकारी संस्थाओ को निपटाते हुए उनका निजीकरण कर दिया और हाल में ही जब बीएसएनएल ने बिलकुल चीन सीमा के पास अपना टावर खड़ा किया तो मानो ऐसा लगा की मोदी जी ने शायद इसके प्राइवेटाइजेशन की योजना गलत बना ली हो।  पर शायद इन सबसे अलग लीग कायम करते हुए भारतीय स्टेट बैंक और उसकी योगी के रामराज में मौजूद आजके प्रयागराज की शाखा सहसों में मोदी जी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी से करीब सात साल पहले ही जनधन योजना लागू करके एक विश्व रिकॉर्ड बनाया था जो आज भी कायम है।  ज़रा सोचिये ऐसे और कितने रिकॉर्ड बने होंगे इस बैंक के द्वारा और आज यह इतना अग्रणी है की इसकी शाखा के बंद पड़े नंबर अब भी मौजूद है शायद जिसकी जानकारी सभी फ़ोन करने वालो को होगी पर भारतीय स्टेट बैंक की इस शाखा को कभी इसको वहा से हटाने की कोई जरूरत महसूस नहीं हुई।  बाकी लीन  मार्क करके खाते से पैसा जब्त करके लगभग चालीस पैतालीस दिन के बैंकिंग परिक्रमा के बाद वाली वापसी के तो कई किस्से मौजूद होंगे।  बहरहाल अभी इसी शाखा पर ध्यान केंद्रित करते है।  और आपको बताते है कि 2003 में खुले एक लोन खाते को बचत खाते में बदलने के बाद वो कैसे बाद में जनधन खाते में परिवर्तित हो जाता है और उसको सही करवाने में होम ब्रांच के अलावा कोई भी अन्य ब्रांच मैनेजर की पावर नहीं होती ऐसा मैं नहीं दिल्ली की सिद्धार्थ एक्सटेंशन ब्रांच के होनहार ब्राह्मण मैनेजर ने बताया और ऐसा वो कर सकते है इसकी जानकारी व्यक्तिगत प्रतिनिधि को सहसों शाखा के सबसे बिजी मैनेजर ने फोन पर हमें बताया था जो दरअसल मेरे डेबिट कार्ड की उम्र ख़त्म होने के कारण पैदा हुई स्तिथि में योनो मतलब यू डोंट नो की यह कब चलेगा और कब टेक्निकल एरर का प्रसाद देगा वाला एप्लीकेशन है शुद्ध भारत में निर्मित। 


बहरहाल मामला तीन चार दिन की बैंकिंग यात्रा काटते काटते सोशल डिस्टेंसिंग की सभी नियम कानून की धज्जिया उड़ाते इस शाखा के मैनेजर ने पंडिताई का वास्ता देकर  की यह मामला आपके खाते की जनधन खाता होने के कारण सिर्फ देखने के अधिकार के साथ सीमित है और इसको सिर्फ मैं देख सकता हूँ जैसे मोदी जी का विकास चारो तरफ चिंघाडे मारकर गड्ढा मुक्त सड़को पर दिख रहा है पर वो आपके किसी काम नहीं आ सकता क्योकि वो जनधन खाता टाइप का मामला है और वो सिर्फ उन्ही के लिए है जो पहले से बैंकिंग उधार या तो चुका नहीं पाए है या चुकाना जरूरी नहीं समझते होंगे क्योकि वही विकास करेंगे और वही बेरोजगारी भी ख़त्म करेंगे  रही बात हम जैसे अनपढ़ गंवार खराब सिबिल स्कोर वाले फर्जी और फिरौती पत्रकारों की तो उनके लिए यह स्वर्ग मार्ग ना कभी था न कभी होगा भले ही वो अपना सब कुछ स्वाहा करके दो चार दस परिवारों को नौकरी दे पाए हो। 

अब चूँकि बैंक बड़ा है और इसके मैनेजर भी बिलकुल दमदार टाइप के सहसों ब्रांच के बड़े ही पोलाइट मैनेजर खरवार जी जैसे जिनकी बैंक का यह सिस्टम मेरे खाते की जानकारी बदलने की इजाजत उनको नहीं दे रहा है यह अलग बात है की मेरी पूरी जन्मकुंडली इसी होम ब्रांच में है जहां से मैंने शिक्षा ऋण लेने की पहली लड़ाई लड़ी थी उस समय के मौजूदा जौहरी साहब से और पूरा ऋण चुकता करने के बाद इस लोन खाते से बचत खाते में परिवर्तन का फल भी भोगा था जो शायद मोदी जी की आगे आने वाली योजनाओ से सबसे पहले वाकिफ हो गया था और बाद में तो पूछो मत।  नोट बंदी में लीन मार्क की जंग और अब ऑनलाइन ट्रांसक्शन के फुल अधिकार पाने की तकनीकी लड़ाई वो भी कोरोना काल में दुनिया के सबसे ताकतवर तकनीकी बैंक से लड़ने की भूल कर रहा हूँ. मुझे पता है कि  इस खबर से बैंक को और बैंक मैनेजर को या सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है जैसे पंडिताई का रोना रोने वाले दिल्ली के सिद्धार्थ एक्सटेंशन के मैनेजर जीतेन्द्र कुमार जी को कोई फर्क नहीं पड़ता की कौन सोशल डिस्टेंस बनाता है या कौन नहीं बनाता।  पर सहसों के बैंक मैनेजर साहब तो रात के सात बजे तक सिर्फ मेरे खाते का करैक्टर बदलने का फुल प्रयास कर रहे है जैसे मोदी जी डिजिटल भारत निर्माण में और योगी जी गुंडा ब्राह्मण मुक्त यूपी बनाने में लगे है। इन्तजार है की काश यूपी के प्रायगराज में बैठे मेरे मैनेजर साहब की कृपा से यह खाता फुल अधिकार मुझे दे सके जिससे मैं अपना डेबिट कार्ड मांग सकूं . मैनेजर साहब ने मुझे तर्क दिया था कि  यह खाता मैन्युअल बैंकिंग से कम्पूटराइज़्ड होने के कारण जनधन बना।  अब दोष किसको दे सरकार और व्यवस्था दोनों इन्ही की तो हैं।  खाता 0011482439457 की आत्म निर्भरता की कहानी है यह. 

 

मेरी अंतिम बातचीत के अनुसार आपके लिए बस यह जान लेना जरूरी है कि  बैंक मैनेजर साहब अब इसको मुंबई रिफर कर रहे है इस खाते में सुधार के वास्ते और शायद वो अगले दो तीन सप्ताह में दुरुस्त हो पाए जबकि उन्होंने एक सप्ताह तक इसको ठीक होने की बात कही है पर अभी तक के विकास की गति के हिसाब से मैंने आपको दो तीन सप्ताह बता दिया है। 
उम्मीद है कि  ऐसी घिसी पिटी  घटिया खबरों से मैं कोई कानूनी गलती नहीं कर रहा होऊंगा अब चूँकि क्या भारत के नागरिक के अधिकार सीमा में आता है और क्या नहीं आता यह तो सिस्टम जानता है जैसा की एमएसएमई की लोन व्यवस्था के साथ आज भारत आगे बढ़ रहा है सिस्टम में। 


 

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