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सीएम साहेब .....   साठ बरस बीत गए पर ना एक बिस्वा जमीन मिली ना सुविधा, देश प्रेम का मिल रहा दर्द के रूप में मुवाअजा  






"जरत बल्ब मा देखलू नाही आ गईस लमहर बिल, मा कथी करो साहब"-आदिवासी जुबानी


 

सीएम साहेब .....   साठ बरस बीत गए पर ना एक बिस्वा जमीन मिली ना सुविधा, देश प्रेम का मिल रहा दर्द के रूप में मुवाअजा  

संतोष दयाल

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 

म्योरपुर, सोनभद्र। विकास खंड के अन्तर्गत आने वाला टंगापाथर (बदुरा)जो कि रिहंद जलाशय से विस्थापित होकर जलाशय के किनारे महज 3-4 किमी दूरी पर सन् 1960 से बसा  है जहा के विस्थापित बदुरा से विस्थापित होकर टंगापाथर (साढो) मे बसे है ।विस्थापन के समय विस्थापितो ने अपनी भूमि राष्ट्र हित मे समर्पित कर दी इस आशा और विश्वास के साथ की बिजली परियोजना के स्थापना के बाद हम विस्थापितो का आर्थिक, शैक्षिक, सामाजिक स्तर उचा होगा परन्तु इनको को 60 वर्षो  के बाद भी 1 विस्वा जमीन तक उनके नाम से नही हो सकी है सुविधाए तो कोसो दुर है इस गांव मे 90% जनजाति समुदाय के लोग निवास करते है  ।शासन के नियमावली एक्ट के तहत रिहंद जलाशय के परिधि मे 5-6 किमी दूरी तक गांवो मे निःशुल्क बिजली देने का प्रावधान है परन्तु यहा बल्ब देखने के लिए लोग तरस रहे है जबकि बिल उनके हाथो मे पहले थमा दिया जा रहा है टंगापाथर गांव मे एक घर मे 5 पुत्र को खैरात मे विभाग के लोग मीटर देकर चले गए जिनका बिल आना प्रारम्भ हो गया है जबकि वह सामूहिक परिवार है उसी तरह एक परिवार के माता, पुत्र का बिल आ गया है इस तरह तमाम विसंगतियो इस गांव मे है जो कि जांच का विषय है ।इन विस्थापितो को एक गज जमीन तक मिल सकी है ।गाँव के युवा समाजसेवी सन्त कुमार यादव ने कहा कि बिजली विभाग यहा कैम्प लगाकर मामलो का निस्तारण करे जिससे गरीबो का आर्थिक    

शोषण रोका जास के ।


 






 


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