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अपने लक्ष्य को धर्म मानकर उसके प्रति निष्ठावान हों ‘संस्कृति ओरियंटेशन प्रोग्राम आरंभ-2020’

अपने लक्ष्य को धर्म मानकर उसके प्रति निष्ठावान हों


‘संस्कृति ओरियंटेशन प्रोग्राम आरंभ-2020’



पद्मश्री प्रोफेसर दिनेश सिंह-डा. देवेंद्र नारायण


रिटायर्ड लेफ्टिनेंट बच्चू सिंह 


लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया 


मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के ‘ओरियंटेश प्रोग्राम-आरंभ-2020’ के अंतिम दिन दिल्ली विवि के पूर्व कुलपति पद्मश्री प्रोफेसर दिनेश सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपको अपना गोल निर्धारित कर उसको ही अपना धर्म मानकर उसके प्रति निष्ठा रखनी होगी। ऐसा करने से आप की सफलता निश्चित है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल को विपत्ति काल न समझें, इसने हमको बहुत कुछ करने का मौका दिया है।


प्रोफेसर दिनेश ने कहा कि हमारे देश में शिक्षा को ब्लैकबोर्ड से बांधकर रखा गया, जबकि इसे व्यवहारिकता से जोड़ना चाहिए था। नई शिक्षा नीति में शिक्षा को व्यवहारिक बनाया गया है। उन्होंने कहा आप कोई भी विषय में अध्ययन कर रहे हैं, आपको सभी विषयों से तालमेल बनाकर चलना होगा। उन्होंने संस्कृति विवि द्वारा विद्यार्थियों के निरंतर संपूर्ण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह अच्छी बात है कि विवि प्रशासन विद्यार्थियों की शिक्षा अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दे रहा है। प्रोफेसर दुबे ने महात्मा गांधी, रामानुजम, अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर के उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोगों ने अपने ध्येय को ही अपना धर्म बना लिया और उसके साथ निष्ठा से जुड़ गए। इसीलिए ये सफल हुए। जब आप अपने ध्येय के प्रति निष्ठावान होते हैं तो आध्यात्मिक होते हैं और सिद्धियां हासिल करते हैं। विवि के कुलाधिपति सचिन गुप्ता द्वारा पूछे गए एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि यह सच है कि हमारे विद्यार्थियों और अभिभावकों पर अत्यधिक प्रेशर रहता है। विद्यार्थी अत्यधिक प्रेशर में कभी-कभी गलत कदम भी उठा लेते हैं। उन्होंने कहा इसका बहुत बड़ा कारण हमारे यहां भेड़ चाल है। उन्होंने दिल्ली के उपहार टाकीज में हुए हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें आग से इतने नहीं मारे गए जितने भगदड़ के कारण मारे गए। यह भगदड़ एक ही दरवाजे से बाहर निकलने के लिए हुई भेड़चाल के कारण हुई। हमारे यहां भी यही है, साथी बच्चे के देख स्वयं भी उसी कोर्स में पढ़ाई करना या फिर सब इंजीनियर बन रहे हैं तो हमें भी बनना है जैसी भेड़चाल से बचना होगा।



वेबिनार में भाग ले रहे अनेक विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए प्रोफेसर दुबे ने कहा कि धैर्य के साथ ठहरना और सोचना जानना चाहिए। फिर निर्णय लेकर आगे बढ़ना चाहिए। अपने अंदर की आवाज को सुनिए वह क्या कहती है, जिस दिन इस अंतर्ध्वनि को सुनना सीख जाएंगे आपको अपनी दिशा मिल जाएगी और सफल हो जाएंगे।


विशेषज्ञ वक्ता टोक्यो युनिवर्सिटी आफ साइंस के मैनेजर डा. देवेंद्र नारायण ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने ध्येय के प्रति स्पष्ट हों। उन्होंने हालीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता अर्नाल्ड श्वार्जनेगर का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सफल हुए क्यों कि वे अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्ट थे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए दो बातें मेरी समझ से बहुत महत्वपूर्ण हैं, नया करने की सोच वाले (इनोवेटिव), वैश्विक सोच वाले बनें। उन्होंने कहा आप हमेशा कुछ नया करने की सोचें। अपनी कार्यशैली में बदलाव के लिए लचीलापन रखें। ऐसा कुछ करने की सोचें जो दूसरे ने नहीं सोचा हो। भारत में जुगाड़ करने वाले सच्चे अर्थों में वैज्ञानिक हैं। ऐसे कई अविष्कार हैं जो जुगाड़ से ही जन्मे हैं। इसके लिए आपको कोई बड़ी या बहुत सारी डिग्रियों की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने बताया कि वे लगभग 40 साल से जापान में हैं। यहां के लोग भारत और भारतीयों के प्रति बहुत प्रेम रखते हैं। यहां भारतीयों के लिए रोजगार के भी बहुत अवसर हैं, बशर्ते वे जापानी भाषा जानते हों। उन्होंने कहा कि जापान में लोग अपने काम के प्रति बहुत गंभीर हैं। यह हमारे सीखने की चीज है।



वेबिनार के प्रारंभ में संस्कृति विवि के कुलपति प्रोफेसर सीएस दुबे ने अतिथि वक्ताओं का परिचय दिया और स्वागत किया। वेबिनार का संचालन संस्कृति विवि की फैकल्टी नम्रता रावत ने किया। अंत में स्कूल आफ इंजीनियरिंग के डीन सुरेश कासवान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।


 


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