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विज्ञान और आध्यात्म का नाता



हर्ष वत्स 

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 

वाराणसी।महर्षि व्यास के अनुसार, विश्व में मनुष्य से श्रेष्ठ और कुछ नहीं। उसी में परम चेतना को उभारने वाली विद्या का नाम अध्यात्म है। वस्तुत: अध्यात्म का लक्ष्य है- मनुष्य के अंदर छिपी शक्तियों और सत्प्रवृत्तियों को मनोवैज्ञानिक पद्धति से इतना आगे बढ़ाना कि व्यक्ति के जीवन में देवत्व छलकने लगे। महर्षि व्यास के अनुसार, विश्व में मनुष्य से श्रेष्ठ और कुछ नहीं। उसी में परम चेतना को उभारने वाली विद्या का नाम अध्यात्म है। वस्तुत: अध्यात्म का लक्ष्य है- मनुष्य के अंदर छिपी शक्तियों और सत्प्रवृत्तियों को मनोवैज्ञानिक पद्धति से इतना आगे बढ़ाना कि व्यक्ति के जीवन में देवत्व छलकने लगे। दूसरी तरफ विज्ञान का लक्ष्य है प्रकृति तथा पदार्थ में छिपी शक्तियों की जानकारी प्राप्त करना, जिससे मनुष्य के जीवन में कोई भौतिक कष्ट न रहे और वह सुख-सुविधा युक्त जीवन जी सके।



जीवन आत्मिक और भौतिक दोनों तत्वों से मिलकर बना है, इसलिए विज्ञान व अध्यात्म अलग-अलग होते हुए भी पूरक हैं। विज्ञान और अध्यात्म के संबंधों पर विश्व की प्रमुख हस्तियों के विचार इस प्रकार हैं :स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि मनुष्य का भविष्य उसके सही अर्र्थो में वैज्ञानिक और सच्चे आध्यात्मिक होने पर टिका है। विज्ञान को जहां धर्म से मानवीयता की सीख लेने की जरूरत है, वहीं धर्म के क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रयोग की आवश्यकता है।



सापेक्षता सिद्धांत के जन्मदाता अल्बर्ट आइंसटीन के अनुसार, इस संसार में ज्ञान और विश्वास दो वस्तुएं हैं। ज्ञान को विज्ञान व विश्वास को धर्म कहेंगे। मैं ईश्वर को मानता हूं, क्योंकि इस सृष्टि के अद्भुत रहस्यों में ईश्वरीय शक्ति ही दिखाई देती है। अब विज्ञान भी इस बात का समर्थन कर रहा है कि संपूर्ण सृष्टि का नियमन एक अदृश्य चेतना कर रही है।संत विनोबा भावे का कहना है कि धर्म और राजनीति का युग बीत गया, अब उनका स्थान अध्यात्म और विज्ञान ग्रहण करेंगे।



वैज्ञानिक हक्सले ने कहा था, धर्म को लोभ और भय से मुक्त किया जाना चाहिए। उसमें काल्पनिक मान्यताओं का निराकरण होना चाहिए और चेतना को परिष्कृत करने की उसकी मूल दिशा एवं क्षमता को प्रभावी बनाया जाना चाहिए।



साइंस ऐंड रिलीजन के लेखक वैज्ञानिक एच. कैरोलिंग ने लिखा था, इक्कीसवीं शताब्दी में अध्यात्म को विज्ञान का और विज्ञान को अध्यात्म का अभिन्न अंग मान लिया जाएगा। तब विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय से ही उभय पक्षीय प्रगति का संतुलन आधार बन सकेगा।

टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
अति उत्तम व बहुत जानकारी से पूर्ण

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