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बाहरी टीचर घर से कर रहे हैं नौकरी

बाहरी टीचर घर से कर रहे हैं नौकरी




  • पूरा वेतन लगाने के लिए चढ़ाना होता है भारी चढ़ावा

  •  सभी ब्लाक का अलग-अलग रेट व फंडा

  •  स्कूलों में की जाय औचक निरीक्षण तो पूरे टीचर नहीं, कुछ के मिलेंगे छुट्टी के आवेदन पत्र


 


नीरज पाण्डेय 


लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 


सोनभद्र।बेसिक शिक्षा विभाग में गायब रहने की परंपरा कोई नई नहीं है। जिलाधिकारी के औचक निरीक्षण में भले ही शिक्षा विभाग के कार्यालय की पोल खुल गयी लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हो रहा  दरअसल अभी तक जिलाधिकारी को टीचरों के स्कूल से गायब रहने की शिकायत मिलती रही है लेकिन जब जिकाधिकारी खुद औचक निरीक्षण करने पहुंचे तो कार्यालय का हाल देखकर दंग रह गए। कई स्टाफ बिना बताए नदारत थे।



जिलाधिकारी भले ही कार्यालय से गायब कर्मचारियों पर कार्यवाही करने का निर्देश दिया है लेकिन इस कार्यवाही से बेसिक शिक्षा विभाग के उन कर्मचारियों पर कोई खासा असर नहीं पड़ने वाला, क्योंकि यह कोई पहली बार कार्यवाही नहीं हो रही । उरमौरा स्थित बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात एक बाबू पर पिछले कुछ वर्षों में कई बार गंभीर आरोप लगे लेकिन विभाग के चहेते व अपनी मजबूत पकड़ रखने के कारण उसका कुछ भी नहीं हुआ । वह कार्यवाही व सिस्टम को जान चुका है जिसके कारण वह कुछ दिनों से चुप्पी साधे रहता है लेकिन बाद में वह फिर पुराना ढर्रा अपना लेता है। सूत्रों की माने तो स्कूलों में तैनात टीचरों के स्कूल से गायब होने का रेट भी यहीं से तय होता है।


लॉक डाउन के बाद अध्यापकों को स्कूल जाने के आदेश दिया गया लेकिन कोरोना जैसी महामारी में दूर दराज जिलों में रहने वाले अध्यापकों के सामने बड़ी मुसीबत आ गयी। दूर दराज में रहने वाले अध्यापक स्कूल न जाने के लिए सेटिंग व जुगाड़ में पड़ गए ।


सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बाहरी टीचरों के न आने पर खासा चढ़ावा चढ़ने में सभी ब्लाक टॉप पर चल रहे हैं । या यूं कहें होड़ सी मची है । गैर जनपद के रहने वाले अध्यापक स्कूल न जाकर सुविधा शुल्क के बदौलत घर से ड्यूटी बजा रहे हैं। जिस मोबाइल को लेकर कभी बाहरी अध्यापक विरोध कर रहे थे वही मोबाइल आज उनका साथी बना हुआ है। घर बैठे वे पूरा डाटा नोट कराने से लेकर अधिकारियों के साथ डीलिंग भी घर बैठे कर रहे है।
लोगों का कहना है कि जिस तरीके से जिलाधिकारी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में औचक निरीक्षण किया हैं उसी तरह स्कूलों का भी औचक निरीक्षण करें तो वहाँ टीचर के बजाय छुट्टी का प्रार्थना पत्र ही मिलेगा।


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