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नेक साथी व् पत्रकारिता के एक सच्चे सिपाही का का यूं जाना , लोकल से ज्यादा सोनभद्र के गाँव की उम्मीद की क्षति


विजय शुक्ल


लोकल न्यूज ऑफ इंडिया


दिल्ली. सूर्यमणि कनौजिया एक आवाज और एक अलग सा अंदाज जिसके प्रणाम शब्द की गूँज आज मुझे ज्यादा रुला रही है। ना जाने क्यों कैसे यह हादसा हुआ ? पर जो हुआ यह गलत हुआ।  शायद लोकल न्यूज ऑफ इंडिया के हजार किलोमीटर दूर बसे सोनभद्र के इस सेनापति की जरूरत लोकल से ज्यादा सोनभद्र की बेटियों और सोनभद्र के लोगो की थी। कभी मिला नहीं पर सोनभद्र की बारीक से बारीक दर्द की गूँज सूर्यमणि ने हम तक पहुंचाई . और आज जब लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया की टीशर्ट में सूर्यमणि को लिपटे देखा तो नाहक ही आँखों से आँसू निकल पड़े। 



सूर्यमणि एक नाबालिग  के साथ हुए बलात्कार के बाद उसकी जहर खिलाकर ह्त्या की रिपोर्टिंग के साथ साथ चोपन में दहेज़ की लालच में एक नव विवाहिता की हत्या और बाद में उसकी दो साल की बच्ची की ह्त्या पर भी काम कर रहे थे।  तहकीकात शुरुवाती स्तर पर थी पर जिस तरह से सूर्यमणि का जमीनी स्तर पर लोगो की पीड़ा को उजागर करने की ललक थी वो मानो अपनी खुद की पीड़ा जैसी होती हो।  कोन स्तिथ स्कूल की हाल फिलहाल की रिपोर्टिंग हो जिस पर डीएम महोदय ने कार्रवाई की या बाकी मामले सब पत्रकारिता के धर्म का सही निर्वाह ही था। 



पता नहीं यह हादसा है या साजिश पर दिल यह मानने को तैयार ही नहीं है की सूर्यमणि का यह हादसा है।  पुलिस अगर चाहेगी तो कुछ तो निकलेगा क्योकि वो किस जगह शाहगंज में रुका था इसका भी पता नहीं है।  शिवद्वार से पांच बजे निकलने के बाद साथी रिपोर्टर कुमारी रागिनी से उसकी बात तभी हुई थी।  क्योकि दोपहर चार बजकर छब्बीस मिनट पर मुझे सूर्यमणि का फ़ोन आया था और उन्होंने शिवद्वार से निकलने की बात की थी क्योकि ग्राम प्रधान बनारस था जिसकी  शायद उनको किसी मामले में वीडियो बाईट लेनी थी। यह मामला बनौरा में गौरी मंदिर के पास का है जैसा की रात्रि बारह बजकर छियालिश मिनट पर किसी पुलिस के साथी रामबिलास यादव जी की मिस्ड काल थी जिसपर सुबह बात करने पर यह जानकारी मिली। अब जब सूर्यमणि के दोस्त विकास रघुवंशी ने कुछ फोटो ग्राफ भेजे जिसमे बाइक की हालत देखने के बाद एक सवाल इस तरह का भी आया कि  बेहद संजीदा और सरल दिखने वाला सूर्यमणि इतनी स्पीड में बाइक से टक्कर कैसे मारेगा ? क्या हुआ था या हुआ होगा अब यह हमारे साथी पत्रकारों के लिए एक चुनौती है।  



              साथी सूर्यमणि की हाल की यह रिपोर्ट 


हम सब साथ मिलकर इसकी तह तक जाए और मुझे यह पता है कि  सूर्यमणि अपने पीछे पत्नी माँ बाप और सास ससुर छोड़ गए है यही अकेले इन सब की दुनिया हैं.  अगर आप सब लोकल न्यूज ऑफ इंडिया परिवार की सोच से वाकिफ है तो यह मान लीजिये आज से हम सब इस परिवार के बेटे और सदस्य हैं।  यह परिवार ना सिर्फ हमारी जिममेदारी है बल्कि हमारा कर्तव्य भी। उम्मीद है संकट की घड़ी में पत्रकारिता धर्म के कुछ सच्चे सिपाही जो सोनभद्र की भलाई के लिए अलग अलग संस्थानो व् बैनर के तले अपनी लड़ाई लड़ रहे है इसमें हमारा साथ देंगे और अगर यह हादसा नही साजिश है तो मदद करेंगे। 


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