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एमएसपी अनाज व कांट्रैक्ट खेती लेने वाली एजेंसियों पर भी हो लागू : वशिष्ट गोयल

























  • मंथली ऑडिट का हो प्रावधान
  • जो एजेंसियां किसान से अनाज खरीदें वे हर माह बताएं उनके पास कितना अनाज
  • ऐसा कानून हो जिसमें एजेंसियां एमएसपी के तहत ही उपभोक्ता तक तय रेट बेच सकेंं अनाज
  • एजेंसियों पर ऐसा कानून लागू हो जिसमें किसान से अनाज व कांटै्रक्ट खेती लेने के बाद तय मुनाफा ही कमा सकें  


सोशल काका 

लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया 

गुडग़ांव।  नव जन चेतना मंच ने किसान आंदोलन के बीच किसानों से अनाज व कांट्रैक्ट खेती कराने वाली एजेंसियों पर एमएसपी लगाने की अपील करके नया बवाल खड़ा कर दिया है। मंच के संयोजक वशिष्ट कुमार गोयल ने बुधवार को किसान आंदोलन को देखते हुए कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर बढ़ती समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने सरकार से अपील की कि सरकार जिस तरह से किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए एमएसपी लागू कर रही है, उसी तर्ज पर ही उन एजेंसियों पर भी एमएसपी लागू करे जो भविष्य में किसानों की खेती कांट्रैक्ट पर लेंगी, और किसानों से आनाज लेंगी। वशिष्ट गोयल ने कहा कि सरकार ने बहुत अच्छा कदम उठाया जिसमें किसानों और व्यापारियों के बीच बिचौलिये खत्म कर दिये, लेकिन सरकार से अपील है कि अब सरकार उनपर भी कानून बनाए जो किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए एजेंसी के रूप में काम करेंगी। वशिष्ट गोयल ने कहा कि कानून ऐसा होना चाहिए जिसमेंं किसान से अनाज लेने के बाद कालाबाजारी रोकी जा सके और एजेंसी तय रेट के मुताबिक ही अनाज आगे बाजार में बेच सके जिससे उपभोक्ता को कम कीमत और तय कीमत पर अनाज मिले। उन्होने उदारहण दिया कि जैसे आज के समय में किसान गेहूं 18 रूपए किलो के हिसाब सेक बेच चुका है लेकिन बाजार से उपभोक्ता वही किसान का गेंहू 30 से 32 रूपए में खरीद रहा है। अब एजेंसी से किस भाव में गेहूं बाजार में आ रहा किसी को पता नहीं, बाजार का व्यापारी एजेंसी से किस भाव में ले रहा पता नहीं, लेकिन बीच में एक किलो गेहूं के पीछे 10 रूपए से 12 रूपए के बीच बाजार के व्यापारी व उजेंसी मिलकर कमाई कर रही हैं जिसका भार उन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा जो हर दिन, हर माह अनाज छोटे व्यापारियों से खरीदती हैं। इसी तरह फल-फ्रूट्स, अन्य सभी खेत से पैदा होने वाली सामाग्री पर एमएसपी का ऐसा कानून लागू हो जिससे उपभोक्ता तक सरकार द्वारा तय की गई कीमत पर सभी खाद्य सामाग्री पहुंच सके।

वशिष्ट गोयल ने कहा कि समय है कालाबाजारी खत्म करने का। कानून ऐसा हो जिसमें किसान से खेती कांट्रैक्ट पर लेने के दौरान एजेंसी यह साफ करे कि वह किसान की उपजाऊ जमीन में किस प्रकार की खेती और क्या-क्या करना चाती है। एजेंसी खेती कांट्रैक्ट पर लेने के बाद वही करे जो कांटै्रक्ट के वक्त उसने लिखित में दिया हो। इसी तरह अगर एजेंसी किसान से अनाज ले तो वह किसान से अनाज लेने के बाद कितने मुनाफे में अनाज आगे बाजार में या फिर अन्य एजेंसी को बिक्री करेगी यह पहले से तय हो। इसके साथ ही यह भी तय किया जाए कि एजेंसी किसान से अनाज लेने के बाद हर माह ऑडिट रिपोर्ट दें, जिसमें एजेंसी बताए कि उसने कितना अनाज किसान से लिया था, अब उसके पास कितना अनाज गोदाम में है। श्री गोयल ने कहा कि इस तरह का कानून बनने से एजेंसियां अनाज की कालाबाजारी नहीँ कर सकें, और अनाज का अवैध भंडारण भी नहीं कर सकेंगी। वशिष्ट गोयल का कहना है कि किसानों को पता है कि इस कानून से उनका फायदा होना है, लेकिन किसान आज अपना भविष्य बचाना चाहता है, अब सरकार को उसके भविष्य के फायदे के बारे में बताना होगा, मैं सरकार से अपील करता हूं कि सरकार हमारे द्वारा रखे गए बिंदुओं पर जरुर गौर करे।

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