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कही आतंकवादी पर बेटा भारी ना पड़  जाय

कही आतंकवादी पर बेटा भारी ना पड़  जाय 

 

वाह री दुनिया क्या क्या खेल दिखा रही है दिल्ली वालो को जिस दिल्ली में गांधी की ह्त्या हुई और जिस दिन हुई उसी दिन एक युवक जय श्री राम और दिल्ली पुलिस जिंदाबाद के नारे के साथ बन्दूक लहराता हुआ जामिया के छात्रों को धमकाता है और यह सब उस बयान के ठीक बाद का कार्यक्रम है जिसमे एक केंद्रीय मंत्री ने गोली मारो का फरमान जारी किया था जो आज फेसबुक पर एक बब्बर शेर की तरह दिखाया जा रहा है और दूसरे ने केजरीवाल को आतंकवादी कह डाला।  हालांकि आतंकवादी वाला मुद्दा तो भाजपा के गले की फांस बनता नजर आ रहा है ठीक वैसे ही जैसा पिछले चुनाव में गोत्र वाला बयान था।  पर कुल मिलाकर केजरीवाल की टीम जिस तरह से इमोशनल प्ले कार्ड खेल रही है और भाजपा पूरे उन्माद पर है हिन्दू मुस्लिम का मुद्दा बनाने को लगता है दिल्ली की जनता बिलकुल बदलाव चाहती हो भाजपा के हिसाब से पर ऐसा है क्या ? यह सवाल भी बड़ा मजेदार है वोटर कह रहे है कि  कांग्रेस का खाता तो इस बार खोलना चाहिए भाजपा के सर्वे तो केजरीवाल को तीन और पांच सीटों पर निपटा रहे है पर लगता है सब कुछ उलटा पुल्टा बोले तो केजरीवाल ने बेटा हूँ तो वोट देना आतंकवादी हूँ तो मत देना बोलकर जनता के उस धड़े को तो सम्हाल ही लिया है जिसके कंफ्यूज होने के चान्सेस ज्यादा थे और जीत हार का मसला भी वही तय करते रहे है चुनावों में हाँ दुसरी और इस तरह के नफरत के बाजरा से सियासी जीत हासिल करने की भाजपा की कोशिश उलटी पड़ती दिख रही है जो मुस्लिम वोटर कांग्रेस की तरफ जाने की भी सोच रहा होगा वो अब लौट आएगा और अगर ऐसा हुआ तो आम आदमी पार्टी पचास पार कर जाय तो भाजपा के लिए ताज्जुब नहीं होना चाहिए पर इन सबके बीच सबसे बड़ा मुद्दा है कि  अब चुनाव बिजली पानी से दूर आतंकवादी और गोली मारो सालो पर उतर आये है क्या लोगो को नौकरी और बेहतर आय के विकल्प कोई मुद्दे है ही नहीं जबकि दिल्ली बेरोजगारों का गढ़  बनती जा रही है क्योकि यहाँ के लोग किराए के खर्चे से पेट पालने के इतने आदि हो गए है कि  पढ़ाई लिखाई  किनारे लगाते जा रहे है और यह संख्या बढ़ती  जा रही है दिन महीनो और सालो में। अब बस देखना यह है कि  इन ताजा बयानबाजी और गोलीबाजी के कांड से  किधर को घूमता है सरकार बनना बिगड़ना अलग है पर चुनाव आयोग क्यों शान्ति से ऐसे मुद्दे को आगे बढ़ने देता है क्योकि बैन लगाने में देरी के अलावा यह बयान तो अब तक दिल्ली के बच्चे बच्चे के पास जा चुके है और अगर केजरीवाल इससे अपने माँ बाप को दुखी बता कर लाखो माँ बाप का समर्थन ले जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। 

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