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अखिलेश हो या योगी सरकार वनकर्मी और वन माफिया है सब पर भारी, धरतीडाँड़ के जंगलो मे अंधाधुंध वन कटान से वन्य प्राणी विलुप्त होने के कगार पर

अखिलेश हो या योगी सरकार वनकर्मी और वन माफिया है सब पर भारी, धरतीडाँड़ के जंगलो मे अंधाधुंध वन कटान से वन्य प्राणी विलुप्त होने के कगार पर



सुर्यमणि कनौजिया


लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया


 


बखरिहवां, सोनभद्र। एक ओर पर्यावरण संरक्षण अभियान को बचाने के लिए लगवाए जाते है लाखो पौधें तो दूसरी ओर साल भर में लकङी विक्रेताओं के द्वारा लाखों पौधों की ही कटाई हो जाती है। रातो रात कई गोपनीय रास्तो से जान बूझकर चैन की कुम्भकर्णी नीद सोते वन कर्मी व विभाग के इशारे पर ठिकाने लगाने के लिये यह लकड़ियाँ पार करा दी जाती है।


बकरिहवाँ, जरहा वन क्षेत्र की दशा बहुत ही दयनीय हो चुकी है।जहाँ दो वर्षों पूर्व जब इस जंगल मे हिरण, भेंड़ ,बंदर,मोर,नील गाय आदि पशु पक्षियां मिलते थे। वही आज वन्य प्राणी सड़को पर आने को मजबूर हो जा रहे है। जिससे सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे है। जिसका कारण है। वनों की अन्धाधुन्ध कटाई जिसके कारण वनों से वन्य जीव आज विलुप्ति के कगार पर है। यहाँ गोपनीय रास्ते से रात के समय मे लकङिया पार की जाती है। और वनों के कटान का सिलसिला दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कभी कभी तो लकङी माफियाओं द्वारा रात के बजाय दिन में ही किया जा रहा है कीमती लकङी पार। जो एक चिंता का विषय बना हुआ है। और इस बात को लेकर वन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। वनकर्मी और वन दरोगा चैन की नींदों की बासुरी बजा रहे है मानो वन के रक्षक ही बने है भक्षक या यूं कहे इस खेल मे सब शामिल है।



 इस मामले में जब गाँव वालों से बात की गई तो गाँव के लोगो ने बताया कि वन कर्मियों के मिली भगत से ही वनों की हो रही है अन्धधुन्ध कटाई।कीमती लकड़ियों का कटान करा कर गोपनीय रास्ते से इनको पार कराया जाता है। दस वर्ष पूर्व में ही लाखों की लागत से हजारों पौधों को तेनुडाँड़ के प्लांट टेसन में तैयार किया जा रहा है लेकिन आज तक एक भी पौधा तैयार नही हो पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि जैसे ही पौधा कुछ तैयार होता है उसकी नीचे से कटाई हो जाती है। कटाई के बाद उसको खुथ्थड़ में लगा दिया जाता है। जब गांव वालों से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि इसकी सूचना जंगल विभाग को दी जाती है। उसके बाद भी मौके पर कोई भी बीट कर्मी नही आता है। आज कही न कही रक्षक ही बने है भक्षक उच्चाधिकारी भी है मौन हैं और कभी कभी किसी राजनेता के दबाव मे वो जरूर पिकनिक मनाने को जांच का नाम देकर लखनऊ से सोनभद्र की यात्रा पर आ जाय पर उससे यह वन माफिया और वन कर्मी आश्वस्त ही होते है और मस्ती से जंगलो की कटान मे जुट जाते है।


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