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आखिर बन्दूक और गुंडों के सहारे मोरारका आर्गेनिक के दफ्तर पर कब्जा करने की जरूरत क्यों आन पडी ?


विजय शुक्ल 

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 
दिल्ली।  कमल मोरारका जी का व्यक्तित्व और उनकी भारतीय किसानो की आय बढ़ाने के साथ बढ़िया उत्पाद लोगो तक पहुंचाने की ललक के कारण ही उन्होंने शायद मुकेश गुप्ता के अनुभव का सही उपयोग करने के लिए GDC Ltd  में जोड़ा होगा। और जैसा की मोरारका आर्गेनिक ने बाजार में अपनी साख बनायी हैं उसके पीछे हो सकता हैं मुकेश गुप्ता के नेतृत्व में उनकी टीम का योगदान रहा हो। इस बात का सही अंदाजा तो कमल मोरारका जी के बाद सर्वेसर्वा उनकी धर्मपत्नी ही बता सकती हैं। 

क्योकि उन्ही के आदेश से दुबारा शायद मुकेश गुप्ता ने राजेंद्र शर्मा को रिपोर्ट करना शुरू किया होगा जो बतौर उनके कमल मोरारका जी ने बिलकुल मना कर रखा था।  बहरहाल यह मामला आतंरिक हैं और इस पर स्वायत्त अधिकार भारती मोरारका जी का और मुकेश गुप्ता का हैं।  पर एक सवाल जो  सबसे बड़ा हैं वो यह कि  इस महामारी में ऐसा क्या मामला बना कि  राजेंद्र शर्मा मय प्रगति मुंद्रा जयपुर गुंडों और बन्दूक के साथ मोरारका ऑर्गेनिक और रिसर्च फाउंडेशन के ऑफिस पर कब्जा करने के लिए जयपुर दफ्तर पर मई में आते हैं और कब्जा कर भी लेते हैं। 
तो क्या मुकेश गुप्ता इतना बड़ा ख़तरा बन गए थे कमल मोरारका जी के इतने खासमखास होते हुए भी इन सबके।  यह कुछ कुछ वैसा लग रहा हैं जैसे जब कंस ने अपने पिता को सत्ता से हटाकर कारागार में डाल  दिया था तो सिंघासन पर बैठते ही सबसे पहले उनके सभी सलाहकारों और ख़ास लोगो को निपटाया। तो क्या यह राजेंद्र शर्मा का प्रभाव हैं ? या यह भारती मोरारका के अपनी सहमति और आदेश से हो रहा हैं ? या प्रगति मुंद्रा अपनी मां के जीतेजी मोरारका ऑर्गेनिक से लेकर बाकी सभी संस्थानों पर अपना पूरा कब्जा चाहती हैं और उन सबको तड़ीपार करके या उनको किसी आरोप प्रत्यारोप में उलझा करके ?

यह सब सवाल और इसके जबाब शायद भारती मोरारका जी ही दे पाए।  क्योकि बिना उनके जबाब के इन सभी आरोपों का कोई परिपक़्व जबाब तैयार होना मुश्किल हैं।  पर बाजार में चल रहे इस सत्ता पर काबिज होने की चर्चा और एक के बाद एक कमल मोरारका के ख़ास जुड़े हुए लोगो को तड़ीपार योजना पर चुप्पी तोड़े बिना कमल मोरारका जी की गुमनामी में विदाई से पर्दा हटाना मुश्किल होगा। 

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