सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कोरोना व वैक्सीनेशन पर विस्तृत चर्चा में कई भ्रांतियों से उठा पर्दा

 


  • कैनविन फाउंडेशन के संस्थापक डा. डीपी गोयल हुए वरिष्ठ डॉक्टर सुशीला कटारिया से रूबरू 
  • कोरोना से सतर्क रहें व वैक्सीनेशन लगवाकर खुद को सुरक्षित करें...

प्रिया पटवाल

लोकल न्यूज़ ऑफ इंडिया



गुरुग्राम: मंगलवार को कैनविन फाउंडेशन के संस्थापक डा. डीपी गोयल ने प्रसिद्ध चिकित्सक मेदांता मेडिसिटी में इंटरनल मेडिसिन विभाग की वरिष्ठ निदेशक डा. सुशीला कटारिया से विस्तार से बात करते हुए ज्ञानवद्र्धक बातें आम जन तक पहुंचाई। गवर्नमेंट गाइडलाइंस ऑफ ओमिक्रोन एवं वैक्सीनेशन विषय पर ऑनलाइन साक्षात्कार में उन्होंने कई भ्रांतियों पर से पर्दा उठाया। 


डा. डीपी गोयल ने सवाल किया कि कोरोना का स्वरूप कोविड19 और ओमिक्रोन को लेकर किस तरह से सावधानी बरती जाए। दोनों के लक्षण क्या हो सकते हैं। जवाब में डा. सुशीला कटारिया ने आईसीएमआर की गाइडलाइंस का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान समय में सिर में दर्द, खांसी, बदन दर्द, बुखार आदि के केस आ रहे हैं। इनमें कोविड के लक्षण भी सामने आ रहे हैं। साथ ही ओमिक्रोन के भी कुछ केस आए हैं। ऐसी स्थिति में भी अभी हमारे यहां उस नुकसान की आशंका बहुत कम है, जो कि पहले हुआ था। 90 फीसदी लोग घरों में ही स्वस्थ हो सकते हैं और हो रहे हैं। इसलिए किसी भी तरह से पैनिक करने की जरूरत नहीं है। धैर्य से काम लें। जांच में अगर कोई कोविड पॉजिटिव आ भी रहा है तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। बहुत से ऐसे उदाहरण हैं, जो कि 5 से 7 दिन के होम आइसोलेशन में भी स्वस्थ हुए हैं। इसलिए पहले होम आइसोलेशन 14 दिन का था, जिसेे घटाकर अब 7 दिन कर दिया गया है। डा. सुशीला कटारिया ने कहा कि अगर लक्षण नजर आते हैं तो होम आइसोलेट हो जाएं। 


मास्क से कम नहीं होता ऑक्सीजन लेवल

डा. डीपी गोयल ने सवाल किया कि क्या आरपीसीआर टैस्ट ओमिक्रोन को डिटेक्ट कर रहा है। जवाब में डा. सुशीला कटारिया ने कहा कि हाल ही में नया आरटीपीसीआर भी लांच हुआ है। उससे भी ओमिक्रोन का पता चलता है। सारे कोविड ओमिक्रोन हों, यह जरूरी नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि वायरस बहुत फास्ट चलता है। डेल्टा ओमिक्रोन एक ही वायरस में मिल जाएं, ऐसा अभी कुछ सामने नहीं आया है। मास्क से ऑक्सीजन लेवल कम होने की भ्रांति से भी उन्होंने पर्दा उठाते हुए कहा कि मास्क लगाने से ऑक्सीजन लेवल जैसा कम कुछ नहीं हो रहा है। अगर किसी तरह की परेशानी होती है तो मास्क उतारकर तीन बार सांस ले लें, कवर हो जाता है। मास्क बहुत जरूरी है। यह हमें हर तरह के वायरस से बचाता है। 


पसंद से सही पर वैक्सीन जरूर लगवाएं

लोगों द्वारा अपनी पसंद की वैक्सीन लगवाई जा रही है। लोग स्पूतनिक, फाइजर वैक्सीन को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। उसे ही लगवाना चाहते हैं, लगवा रहे हैं। क्या वैक्सीन में कुछ फर्क है। इस सवाल के जवाब में डा. सुशीला कटारिया ने कहा कि यह चलन काफी बढ़ा है। लोग वैक्सीन में भी पसंद देख रहे हैं। हालांकि कोवैक्सीन का मॉडल पुराना है, लेकिन इसमें किसी तरह की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि अपनी पसंद से ही सही, लेकिन सभी लोग वैक्सीन जरूर लगवाएं। गर्भवती महिलाएं, फीडिंग कराने वाली महिलाएं भी वैक्सीन लगवा सकते हैं। इसके अलावा बीमारी वाले लोगों को वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। उन्हें पहले से बीमारी है, उसे वैक्सीन कवर करती है। समाज से इस इंफेक्शन को खत्म करने के लिए मास्क, वैक्सीनेशन जरूरी है। कैंसर से पीडि़त अपने डॉक्टर से सलाह लेकर वैक्सीन लगवाएं, ताकि चिकित्सक को पता भी हो। सभी गाइडलाइंस को फॉलो करें। 


दुर्घटना होती हैं, खुद को सुरक्षित रखकर चलें

डा. डीपी गोयल ने सवाल किया कि दोनों डोज लगवा चुके लोगों को भी कोरोना फिर से हो रहा है। ऐसे में लोग परेशान भी हो रहे हैं और डोज को लेकर अफवाहें भी खूब फैल रही हैं। जीवनचर्या से जोड़ते हुए डा. सुशीला कटारिया ने अपने जवाब में कहा कि जब हम सड़क पर चलते हैं तो बहुत सुरक्षित होकर चलते हैं। ऐसे में सामने से कोई आकर हमें टक्कर मार दे तो फिर क्या किया जाए। यानी हम कितने भी सुरक्षित होकर चलें, दुर्घटना का अंदेशा रहता है। फर्क यह है कि हमारा नुकसान कम होता है। ऐसा ही वैक्सीन में है। हमें अगर फिर से पॉजिटिव हो गए हैं तो हमें अधिक नुकसान नहीं होने वाला। बूस्टर डोज के सवाल पर डा. सुशीला कटारिया ने कहा कि यह दोनों डोज लगने के 9 महीने अंतराल पर लगाई जा रही है। 60 से कितनी भी अधिक उम्र के लोग बूस्टर डोज लगवाएं।  


रोल मॉडल बनकर रहें हेल्थ वर्कर

भविष्य के सवाल पर डा. कटारिया ने कहा कि वेंटीलेटर तैयार हैं। कोविड वार्ड तैयार हैं। ऑक्सीजन की मात्रा भरपूर है। पहले जैसी स्थिति ना बने। फिर भी तैयारी जरूरी है। हमने पिछले समय ने बहुत कुछ सिखाया है। लोग जागरुक रहें। आम आदमी के लिए संदेश यही है कि जो जो तरीके हम सुरक्षित रहने को अपना सकते हैं, उन्हें अपनाएं। वैक्सीन, मास्क को जीवन का हिस्सा बनाएं। एक्सरसाइज करें। मानसिक रूप से मजबूत रहें। खुद को खुश रखें। स्क्रीन टाइम कम रखें। पॉजिटिव रहें। चिकित्सा जगत पूरा प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, नर्सेज, पेरा-मेडिकल स्टाफ अपना पूरा ख्याल रखें। हेल्थकेयर में रोल मॉडल का काम करें। वैक्सीन लगवाने के साथ मास्क व हेंड वॉश करें, ताकि लोग उन्हें देखकर सीखें। 


हर हाल में साथ खड़ी है कैनविन फाउंडेशन

वहीं डा. डीपी गोयल ने कहा कि कैनविन फाउंडेशन जनता के साथ खड़ी है। पूरे 24 घंटे संस्था की टीम सेवाएं दे रही है। किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं। जब भी मदद की जरूरत हो, कैनविन से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हम डा. सुशीला कटारिया को रोल मॉडल मानकर उनको फॉलो कर सकते हैं।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

टैंकर ने बाइक सवार को मारी सामने से टक्कर बाइक चालक की मौत

प्रदीप कुमार जायसवाल लोकल न्यूज आँफ इंडिया  बीजपुर,सोनभद्र।शुक्रवार की सुबह अमन केसरी पुत्र शिव लोचन केसरी निवासी चेतवा किसी कार्य से नेमना जा रहा था कि सामने से आ रही टैंकर ने मोटर साइकिल को मारी टक्कर घर वालों ने तत्काल लेकर गए अस्पताल जहां डॉक्टरों ने किया मृत्यु घोषित, टैंकर मौके से फरार।

नायाब सितारा"

कारनामों की भब्य चमक के साथ एक बार फिर सुर्खियों में छाया 'म्योरपुर' भब्य व्यवस्था से शिक्षक समाज हुआ स्तब्ध, 'म्योरपुर के गौरव'का हुआ स्वागत  लग गया मजमा, बढ गया रुतबा... सिर गर्व से हुआ ऊचा, आशा की किरण और व्यवस्था बचाने की दिव्य मुहिम के बीच  निखरने लगी "आभा" मेधा की चमक, शिक्षक सतर्कता के साथ कर्मयोगी का हुआ जय- जयकार!  चमकते सूरज की तरह परीक्षाओं की तपिश में कुन्दन बनकर निकले 'नये खण्ड शिक्षा अधिकारी' निष्ठा फैलाने की ललक, परम्परा,सिद्धांत त्याग,एवं समर्पण के बीच बेसिक शिक्षा म्योरपुर के गौरव बने "विश्वजीत" "साधना द्विवेदी" लोकल न्यूज़ आफ इन्डिया म्योरपुर, सोनभद्र। परिन्दों को मन्ज़िल मिलेगी यकीनन ए फैले हुए उनके पख बोलते है वे लोग रहते हैं खामोश अक्सर जमाने में जिनके हुनर बोलते है...  जैसे मेधा किसी की मोहताज नहीं होती... बड़े सपने कुछ यूँ ही नहीं पूरे होते उसी तरह कुशल प्रशासक का तमगा यूँ ही नहीं मिलता उसके लिए व्यक्तित्व एवं कृतित्व से विभाग के विविध रगों को सयोजने का काम करना पड़ता है, कुछ इन्ही पक्तियो से प्रेरित गजब के रस

आखिर देश की सबसे बड़ी क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी आदर्श क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के लाखो निवेशकों को रोजगार और जीविका देने की गति पर पूर्ण विराम क्यों ?

  (फाइल फोटो) विजय शुक्ल  लोकल न्यूज ऑफ इंडिया  दिल्ली।  अखबारों की सुर्खियों पर नजर डाले तो आपको अंदाजा लगेगा कि  वास्तविकता में लगभग दो दशकों तक लाखो  निवेशकों के भरोसे पर खरी साबित होने वाली आदर्श क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी  लिमिटेड पर आखिर  जांच एजेंसियों ने  प्रवर्तन निदेशालय ने ऐसी कौन सी गड़बड़ी पाई कि इस पर पूर्ण विराम लगाने की ओर उसकी सभी सम्पत्तिया और बैंकिंग सीज करके अब तक यानी लगभग चार साल से एक परिसमापक नियुक्ति तक करवाने में अक्षम रही।  सवाल अगर गड़बड़ी का हैं तो कार्रवाई सुनिश्चित करना ही ऐसी एजेंसियों का धर्म हैं और स्वतः संज्ञान लेकर भी यह अपनी कार्रवाई कर सकती हैं यह भी इनके अधिकार क्षेत्र का यही मामला हैं पर सरकार और सियासी गलियारों के अलावा समाज में रोजगार , बचत और लोगो की जीविका का साधन बनी देश दुनिया में क्रेडिट कोआपरेटिव क्षेत्र में दो दशकों तक बिना किसी विवाद या शिकायतों के चलने वाली इस कोआपरेटिव सोसाइटी पर क्या वाकई लें दें की गड़बड़ी या मनी लॉन्ड्रिंग के कारण ताला लटका या इसमें कोई राजनीतिक रंजिश जैसा भी कोई एंगेल हैं ? यह तो शायद जांच करने के बाद संबंधित विभागीय या