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खेल में विस्तार के क्या है इसके आसार ?

 

रोहित चौधरी 

लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 



दिल्ली: आज किसी भी खेल के लिए उसका आखिरी मकसद ओलिंपिक तक जाना होता है लेकिन वह तक पहुंचने में कई साल और काफी मेहनत लगती है लेकिन इतना सब क्यों किया जाता है ये शायद बहुत ही कम लोगो तक बात पहुँचती है अधिकतर लोगो को ये लगता है की ओलंपिक्स जाने  से खेल की गुणवत्ता और खेल में बहुत ही सुधार  होते है।  दुनिया भर में 8000 से भी ज्यादा स्पोर्ट्स को खेला जाता है , जिसमे 50 से ज्यादा खेलो में आज लीग प्रतियोगिता को करवा रही है लेकिन आज भारत में तक़रीबन 10 खेलो में लीग की शुरुआत हुई है।  ये बहुत ही अच्छा है की भारत अब धीरे धीरे अपनी खेल की क्षमता को बढ़ा रहा है जिसका परिणाम दुनिया ने एशियाई गेम्स में देखा यही पहली बार ऐसा हुआ है की भारत ने 100 मेडल का आकड़ा पार किया है।  इसमें श्रेय कई लोगो को जाता है खिलाडी कोच फेडरेशन और खेल मंत्रालय का और भी बहुत लोग है ।  लेकिन क्या इतने से ही हमें खुश हो जाना चाहिए या भारत को अब अपना अगला मकसद आने वाले 2024 ओलिंपिक के तरफ ध्यान देना चाहिए , देखा जाए तो कुछ ही खेल में एशिया महादीप में मुकाबला है। लेकिन कुछ ऐसे भी खेल है जिसमे हर महादीप से शानदार खिलाडी आते यही और कोई पता नहीं होता की इस बार कौन से महादीप का खिलाडी ओलिंपिक में बाज़ी मार लेगा कोई ना कोई उलटफेर हर बार देखने को मिलता है। 

क्या किया जाये जिस से खिलाड़ी के खेल  में और भी सुधार हो ?

आज दुनिया भर में हर अच्छे खेल के लीग प्रतियोगिता खेले जाते है जहाँ कई देशो के खिलाडी आकर उसमे भाग लेते है। उसी तरह हर देश में घरेलु लीग प्रतियोगिता भी होती रहती है जिससे खिलाडी को ज्यादा से ज्यादा खेलने से अच्छे और बड़े प्रतियोगिता केलिए खुद को तैयार कर लेता है। लेकिन इस सभी में कुछ बाधा खिलाडी को और भी आते है देश में 60% से ज्यादा खिलाडी आज माध्यम परिवार से आता है जिसके लिए खेल तो उतनी समस्या नहीं है  लेकिन खेल में लगने वाले उपकरण तथा उसकी देखरेख बहुत ही महंगी पड़ती है (डाइट स्पोर्ट्स ट्रेनिंग …) ऐसा क्या किया जाए जिस से खेल में निचले स्तर के खिलाड़ी को खेल की देखरेख का भर कम पड़े।  कई मायने में देखा जाए तो इसका समाधान एक ही देखा जा सकता है और वो है घरेलु मैच में कॉर्पोरेट का रूचि लेना , देखा जाए तो ये बहुत ही मुश्किल काम है क्योकि आज भारत में खेल की क्या अहमियत हो रही है ये कॉर्पोरेट बहुत ही अच्छे से जानता  है और वह अपना पैसा अच्छे जगह ही निवेश करना चाहता है जिसे उसके व्यापार में बढ़ोतरी होगी लेकिन बात को ये भी समझना होगा की आज अगर किसी नए खिलाड़ी को शुरुआत के समय में ही कुछ छोटे मोटे लोगो की सहायता मिल जाये तो वह खेल से अलग नही होगा और एक लम्बे समय के लिए खिलाड़ी खुद को खेल के लिए समर्पित कर के रखेगा जो किसी ना किसी जगह खुद को अच्छे प्रदर्शन कर के साबित करेगा।  

ऐसे में लीग प्रतियोगिता और घरेलु प्रतियोगिता में फेडरेशन को और भी नए तरीके से शामिल होना होगा ताकि खिलाड़ी को ज्यादा से ज्यादा समय खेल में रखा जाये। फेडरेशन को भी सभी काम बजाय खुद करने के कुछ ऐसे लोगो को साथ जोड़ना चाहिए जो खेल में कॉर्पोरेट को शामिल कर सके देखा जाए तो आखिर में किसी भी खेल और जीवन  सबसे बड़ा नियम तो पैसे कमाना है और अगर किसी खिलाड़ी को खेलने के ही अच्छे पैसे मिले तो इससे अच्छी क्या बात हो सकती है। आज सभी खेल के फेडरेशन को इस बात पर अच्छे से चिंतन करने की जरुरत है , खेल में किस तरह  और लोगो को जोड़ा जाये जो खेल को अच्छे से प्रोसाहित करे तथा खिलाड़ी की आधारभूत जरुरत को पुरा करने में उनकी सहयता करे जिससे एक अच्छे खिलाड़ी को खेल को कभी नही छोड़ने पर मजबूर होना पड़े। लेकिन सवाल है की इसका क्या होगा और कैसे होगा , लेकिन आने वाले खिलाडी को क्या आस देकर खेल में जोड़ा जाए ये सोचन बाकि है। …

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