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वाराणसी: सर्दियों का मौसम आमतौर पर त्योहारों और पारिवारिक मेल-मिलाप का समय माना जाता है, लेकिन दिल के लिए यह साल का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर भी हो सकता है। इस अवधि में कार्डियक इमरजेंसी के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। ठंडा मौसम, लाइफस्टाइल में बदलाव और समय पर इलाज न लेना मिलकर जिस स्थिति को जन्म देते हैं, उसे “विंटर हार्ट” कहा जा सकता है—ऐसा दिल जिस पर अतिरिक्त दबाव होता है, कई बार उन लोगों में भी जो खुद को जोखिम में नहीं मानते।
सर्दियों में कम तापमान के कारण ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और दिल को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। साथ ही खून गाढ़ा होने लगता है और क्लॉट बनने का रिस्क बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक की संभावना बढ़ती है, खासकर बुज़ुर्गों और डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में। इस मौसम में कई लोग फिजिकल एक्टिविटी कम कर देते हैं, भारी भोजन करते हैं और शुरुआती चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जिससे दिल पर अनावश्यक बोझ पड़ता है।
बीएलके–मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कार्डियोथोरेसिक व वैस्कुलर सर्जरी विभाग के चेयरमैन एवं चीफ डॉ. रामजी मेहरोत्रा ने बताया “अच्छी खबर यह है कि आधुनिक हार्ट सर्जरी में हुई प्रगति ने इस हाई-रिस्क मौसम को उम्मीद के दौर में बदल दिया है। बीटिंग-हार्ट बायपास सर्जरी और मिनिमली इनवेसिव बायपास जैसी तकनीकों से अब छोटे चीरे के जरिए सर्जरी संभव है, कई मामलों में छाती की हड्डी खोले बिना ही ऑपरेशन किया जा सकता है और मरीज जल्दी, कम दर्द के साथ रिकवर कर पाते हैं। इससे कामकाजी लोगों और बुज़ुर्ग मरीजों—दोनों के लिए अस्पताल में कम दिन रुकना, जल्दी सामान्य जीवन में लौटना और इन्फेक्शन या लंबी अवधि की जटिलताओं का रिस्क कम होना संभव हुआ है।“
कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग (CABG), हार्ट वाल्व की रिपेयर या रिप्लेसमेंट और दिल की कुछ जन्मजात बीमारियों की सर्जरी, इन सभी को आधुनिक तकनीकों से बड़ा फायदा मिला है। चुने हुए मरीजों में अब धड़कते हुए दिल पर, साइड से छोटे चीरे के जरिए बायपास सर्जरी की जा सकती है, जिससे शरीर पर कम ट्रॉमा पड़ता है और ऑपरेशन की क्वालिटी भी बनी रहती है। एडवांस हार्ट-लंग मशीनें, बेहतर एनेस्थीसिया और मज़बूत आईसीयू केयर ने जटिल सर्जरी को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बना दिया है।
डॉ. रामजी ने आगे बताया “तरक्की केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। हाई-एंड इमेजिंग, बेहतर हार्ट पंप और ऐसे डिवाइसेज़ जो सर्जरी के दौरान और बाद में सर्कुलेशन को सपोर्ट करते हैं, अब बेहद गंभीर मरीजों में भी इलाज को संभव बना रहे हैं, जिन्हें पहले इनऑपरेबल माना जाता था। स्ट्रक्चर्ड रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम, जल्दी मूवमेंट और पर्सनलाइज़्ड मेडिकेशन प्लान सर्जरी के बाद लंबे समय तक बेहतर जीवन-गुणवत्ता और सर्वाइवल सुनिश्चित करते हैं। हालांकि, कोई भी तकनीक समय पर कदम उठाने की जगह नहीं ले सकती। छाती में दबाव या भारीपन, दर्द का बांह, जबड़े या पीठ तक फैलना, असामान्य सांस फूलना, अचानक पसीना आना या बेहोशी, खासकर सर्दियों की सुबह के समय, ये सभी खतरे के संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखते ही घरेलू उपायों पर निर्भर रहने या दर्द अपने-आप ठीक होने का इंतज़ार करने के बजाय तुरंत इमरजेंसी हार्ट टीम वाले अस्पताल पहुंचना चाहिए।“
सर्दियां दिल की सुरक्षा के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी कदम उठाने का भी सही समय हैं। परतों में कपड़े पहनना, अचानक ठंडी हवा के संपर्क से बचना, घर के अंदर भी एक्टिव रहना, स्मोकिंग छोड़ना, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित लेना और समय-समय पर हार्ट चेक-अप कराना—ये सभी उपाय हार्ट इवेंट के रिस्क को काफी कम कर सकते हैं। 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, या जिन्हें डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या फैमिली हिस्ट्री है, उन्हें समस्या आने तक जांच टालनी नहीं चाहिए।
“विंटर हार्ट” डर की कहानी नहीं है। जागरूकता, समय पर डायग्नोसिस और आधुनिक कार्डियक सर्जरी की ताकत से गंभीर रूप से बीमार दिलों को भी ठीक किया जा सकता है और उन्हें एक नई, स्वस्थ शुरुआत दी जा सकती है। कार्डियक सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, नर्स, टेक्नीशियन—और सबसे अहम, मरीज व उनके परिवार—एक टीम के रूप में मिलकर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह मौसम दिल के लिए भी गर्मजोशी, उत्सव और नई ज़िंदगी का समय बना रहे।

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