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रोहित–त्रिशला : कोसी तट, हिमालय की पवित्र वेदी और वैदिक परिणय

 



प्रिया बिष्ट 

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 

गर्जिया, ढिकुली. उत्तराखंड के रामनगर स्थित ढिकुली क्षेत्र में कोसी नदी के शांत तट पर डॉ. रोहित कटारिया और डॉ. त्रिशला परिहार का विवाह प्रकृति, परंपरा और आधुनिकता के संतुलित संगम के रूप में सम्पन्न हुआ। हिमालय की हरित शृंखलाओं की पृष्ठभूमि और कोसी के निरंतर प्रवाह के बीच आयोजित यह डेस्टिनेशन वेडिंग अपने वैदिक स्वरूप और सादगीपूर्ण आयोजन के कारण विशेष रहा।


डॉ. त्रिशला परिहार स्वर्गीय श्रीमती पी.के. देवी एवं श्री रामाधार सिंह की पौत्री तथा श्रीमती सीमा सिंह और प्रो. अनिल कुमार सिंह की सुपुत्री हैं। उन्होंने एमबीबीएस की उपाधि प्राप्त की है और वर्तमान में एचआईएमएसआर, दिल्ली से एमडी (सामुदायिक चिकित्सा) की पढ़ाई कर रही हैं।



डॉ. रोहित कटारिया स्वर्गीय श्रीमती कमला देवी एवं श्री दौलत राम के पौत्र तथा श्रीमती मुकेश लता और श्री रमेश कटारिया, गुरुग्राम के सुपुत्र हैं। उन्होंने वीएमएमसी से एमबीबीएस और एमडी (रेडियोलॉजी) की उपाधि प्राप्त की है तथा एम्स ऋषिकेश से इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी में पीजीडी किया है।


विवाह समारोह कोसी नदी के तट पर स्थित कॉर्बेट हाइडअवे परिसर में आयोजित किया गया। आधुनिक साज-सज्जा और सुव्यवस्थित आतिथ्य के बीच विवाह की सभी रस्में शास्त्रोक्त वैदिक पद्धति से सम्पन्न कराई गईं। वैदिक मंत्रोच्चारण और संपूर्ण विवाह विधि का संचालन PaidPandit.com की ओर से मौजूद ब्राह्मण जनों द्वारा इसके सीईओ पंडित विनय शर्मा की  अगुवाई में किया गया। प्रशिक्षित आचार्यों द्वारा उच्चारित मंत्रों, विधिवत हवन और शंखध्वनि के साथ जयमाला एवं सप्तपदी की रस्में सम्पन्न हुईं।



समारोह का एक विशेष आकर्षण वैदिक मंत्रोच्चार के पश्चात सम्पन्न हुई आरती रही। अग्नि और वेद मंत्रों के बीच नवदंपति की आरती उतारी गई, जिसके साथ उपस्थित परिजनों ने मंगलगान किया। नदी तट पर दीपों की पंक्तियों और आरती की ज्योति ने वातावरण को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। कोसी के शांत प्रवाह के बीच आरती का दृश्य पूरे आयोजन को पारंपरिक भाव से जोड़ता दिखाई दिया।


अग्नि को साक्षी मानकर लिए गए सात वचनों के साथ विवाह संस्कार पूर्ण हुआ। आयोजन में अनावश्यक आडंबर से परहेज करते हुए सांस्कृतिक मर्यादाओं का पालन किया गया। पुष्पों के स्तंभों और पुष्प सज्जा से सुसज्जित मंडप ने पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखा।


कोसी नदी का शांत प्रवाह और पृष्ठभूमि में हिमालयी पर्वत श्रृंखलाएँ समारोह की प्राकृतिक शोभा बनी रहीं। उपस्थित अतिथियों ने इसे आधुनिक डेस्टिनेशन वेडिंग और सनातन वैदिक परंपरा के संतुलित संयोजन का उदाहरण बताया।


दोनों परिवारों के आशीर्वाद के साथ सम्पन्न यह विवाह समारोह सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। नवदंपति ने जीवन की नई यात्रा आरंभ की और उपस्थित जनों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। 

डॉली मुंजाल की कंपनी सिल्वरस्लेट द्वारा प्रबंधित यह डेस्टिनेशन वेडिंग को सभी लोगों ने सराहा.  सिल्वरस्लेट के शानदार प्रबंधन में paidpandit.com का सनातन प्रयोग देख अतिथियों का कहना था यह सनातन और नूतन का फ्यूज़न सरीखा हैं. 

कॉर्बेट हाइडअवे का लज़ीज़ भोजन और भवानी जोशी जैसे कर्मियों का मुस्कुराहट भरा आतिथ्य प्रेम इसको और जीवंत बना गया.  रोहित के पिता बसई के पूर्व ग्राम प्रधान रमेश कटारिया का अंदाज मनमोहक दिखा और उनका अपनी संस्कृति के प्रति लगाव और लोक रीतियों को सहेजने का भाव इस वैवाहिक पल को यादगार बना गया.  

प्रोफेसर अनिल सिंह और सीमा सिंह का आतिथ्य स्वभाव सबको भाया. प्रत्येक समारोह में सम्मिलित अतिथि भाव विभोर और आनंदित दिखाई दिया. 

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