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भूख और प्यास से मजबूर आदिवासी पीते हैं नाले का गन्दा पानी

सोनभद्र का है अधिकार बिजली-पानी रोजगार लेकिन ना तो पानी मिला और ना ही बिजली


 


यह स्लोगन हमारे सोनभद्र के माननीय विधायक भूपेश चौबे जी का है लेकिन कुछ लोग अपनी जेब भरने के चक्कर में नहीं होने देना चाहते हैं विधायक जी के सपनों को पूरा।


 


भूख और प्यास से मजबूर आदिवासी पीते हैं नाले का गन्दा पानी



गंगासागर चौधरी


लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया


डाला, सोनभद्र।कोटा ग्राम सभा के डाला गांव में मुन्नीलाल पौधशाला के पास रहने वाले आदिवासी मजदूर आज भी पीते हैं नाले का पानी नहीं है उनके आसपास सौ दो सौ मीटर तक कोई हैंडपंप जबकि डाला में एक अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी है जिनके एजेंडे में यह दर्शाया जाता है कि इनके फैक्ट्री के 10 किलोमीटर के एरिया में बिजली-पानी रोजगार देना है लेकिन कंपनी कहती है की टैंकर से आसपास के सभी गांवों में पानी भेजा जाता है लेकिन इनके यहां नहीं पहुंचता इसलिए लोग पी रहे हैं नाले का पानी और डाला में बड़े पैमाने पर खनन का कारोबार होता है और सरकार को सबसे अधिक राजस्व सोनभद्र जिले से जाता है लेकिन फिर भी आदिवासी मजदूरों को नाले का पानी पीना पड़ रहा है शायद इसीलिए सबसे अधिक कुपोषण के शिकार सोनभद्र में आदिवासी मजदूर ही हैं क्यों नहीं इनको हैंडपंप और टैंकर द्वारा या पाइपलाइन के द्वारा इनको शुद्ध पानी पहुंचाई जा रही है?? क्यों लोग लगे हुए हैं ??


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