सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

बेबस बांध सा रहा था इको पार्क माड़ा, प्रेम और अपनेपन की जीती जागती दुनिया सी हैं यह विवाह माड़ा 

बेबस बांध सा रहा था इको पार्क माड़ा, प्रेम और अपनेपन की जीती जागती दुनिया सी हैं यह विवाह माड़ा 



 


प्रभा पांडेय 


लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 


बीजपुर।  दीपावली की सुबह मैं अपने और एक पारिवारिक मित्र के साथ बेरंग दीपावली को पटाखों के बिना थोड़ा शुकून से प्रकृति की रंगीन मिजाज वाली दुनिया में बिताने निकल पडी थी।  यकीन मानिये मुझे पता नहीं था कि हमारा सफर इतना रोमाँच और मौज मस्ती वाला होगा।  



जैसे जैसे हम लोग बीजपुर से सिंगरौली की तहसील माड़ा  की चैखट तक बढ़ने लगे रास्ता मानो हमें अपनी हसीन आंचलों की छाँव में आनंदित कर रहा था। 



खूबसूरत हरी भरी पहाड़िया और उनके बीच से गुजरता रास्ता मनमोहक भी था और हमें अपने आपको उसकी आँचल में समा जाने के लिए मजबूर करने वाला भी।  मेरे मुंह से अनायास ही निकल पड़ा कि  यह रास्ता तो मानो कुल्लू मनाली का रास्ता जैसा हो।  सच ही तो था बस बर्फ के अलावा बाकी सब कुछ तो मौजूद था इस पचास साथ किलोमीटर के इस सफर में। 



एनसीएल और मध्यप्रदेश टूरिज्म द्वारा छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाके में बसी इस तहसील माड़ा के अंदर शंकर माड़ा , रावण माड़ा , गणेश माड़ा और विवाह माड़ा  यानी हमारा पड़ाव रख रखाव किया जाता हैं। 



माना जाता हैं कि  सातवीं आठवीं शताब्दी के यह स्थल और इस गुफाओ का दायरा अपने आपमें एक समृद्ध और प्रगाढ़ प्रेम वाली सभ्यता का परिचायक सी हैं। 



क्योकि जैसा लोगो ने बताया कि  यह विवाह माड़ा  दरअसल शादी विवाह के मंडप के रूप में बनाया गया था वो भी रानी की अपनी शर्त के कारण की शादी दिन में हो पर मंडप तक जाते हुए उन्हें कोई देखे ना भी।  



सच हैं या फ़साना पर मुझे तो बहुत जलन हुई उस रानी से कि  पहले जमाने में जो सुख सुविधा के कोई साधन नहीं हुआ करते थे तब राजा महाराज अपनी प्रेमिकाओ और रानियों को उपहार में क्या क्या देते हैं ?



और आज कल ...... . बस इशारा काफी हैं बाकी आप लोग खुद समझदार हैं समझ गए ही होंगे। 



बहरहाल कुछ लोगो से बात चीत करने के बाद जैसे ही हम लोग अंदर गए तो मानो वहा की खूबसूरती देखकर स्तब्ध रह गए हो।  बस जी कर  रहा था कि  यही कही एक झोपड़ी डालकर बस जाए। 



और जब दो पेड़ के बीच बने हुए झूले नुमा रास्ते पर इस पार से उस पार जाने का मौक़ा मिला तो मानो ऐसा लगा जैसे लक्ष्मण झूला पर चल रहे हो पर यह उससे भी ज्यादा रोमांचकारी था। 



अब बारी थी बच्चो के साथ झरने के किनारे अपने आपको बेबस गुनगुनाने की।  क्या करूँ पल और नजारा ही ऐसा था शीतल जल , अविरल निर्मल बहती झरने की कलकल की गूँज मानो गुनगुना रही हो कि आओ इक बार फिर से अजनबी बन जाये हम दोनों। 



वास्तव में मजा आया और कोरोना की कैद से सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क की मौजूदगी से निजात भी मिली। 



अच्छी प्राकृतिक छटा से भरपूर , परिवार के साथ शांति , शुकून और प्रकृति के पंचतत्वों की गुनगुनाती दुनिया का आनंद लेने की जगह हैं विवाह माड़ा। 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

रोहित–त्रिशला : कोसी तट, हिमालय की पवित्र वेदी और वैदिक परिणय

  प्रिया बिष्ट  लोकल न्यूज ऑफ इंडिया  गर्जिया, ढिकुली. उत्तराखंड के रामनगर स्थित ढिकुली क्षेत्र में कोसी नदी के शांत तट पर डॉ. रोहित कटारिया और डॉ. त्रिशला परिहार का विवाह प्रकृति, परंपरा और आधुनिकता के संतुलित संगम के रूप में सम्पन्न हुआ। हिमालय की हरित शृंखलाओं की पृष्ठभूमि और कोसी के निरंतर प्रवाह के बीच आयोजित यह डेस्टिनेशन वेडिंग अपने वैदिक स्वरूप और सादगीपूर्ण आयोजन के कारण विशेष रहा। डॉ. त्रिशला परिहार स्वर्गीय श्रीमती पी.के. देवी एवं श्री रामाधार सिंह की पौत्री तथा श्रीमती सीमा सिंह और प्रो. अनिल कुमार सिंह की सुपुत्री हैं। उन्होंने एमबीबीएस की उपाधि प्राप्त की है और वर्तमान में एचआईएमएसआर, दिल्ली से एमडी (सामुदायिक चिकित्सा) की पढ़ाई कर रही हैं। डॉ. रोहित कटारिया स्वर्गीय श्रीमती कमला देवी एवं श्री दौलत राम के पौत्र तथा श्रीमती मुकेश लता और श्री रमेश कटारिया, गुरुग्राम के सुपुत्र हैं। उन्होंने वीएमएमसी से एमबीबीएस और एमडी (रेडियोलॉजी) की उपाधि प्राप्त की है तथा एम्स ऋषिकेश से इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी में पीजीडी किया है। विवाह समारोह कोसी नदी के तट पर स्थित कॉर्बेट ह...

बंधी मे नहाते चपकी के तीन बच्चो की मौत शैलेश कुमार

बंधी मे नहाते चपकी के तीन बच्चो की मौत शैलेश कुमार लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया बभनी / सोनभद्र ।स्थानीय थाना क्षेत्र के चपकी मे बन्धी मे नहाते समय पानी मे डुबने से तीन बच्चो की मौत हो गयी है। प्राप्त जानकारी अनुसार दिनांक कल दोपहर में लगभग दो बजे अपने घर चपकी से महुआ बीनने जंगल मे बंधी के पास आये थे बंधी में तीनों नहाते समय डूब गए। घर वाले शाम को 7बजे खोजते हुए महुए के पास आये तो बंधी के किनारे कपड़ा मिला जिसके आधार पर बंधी में तलाशा गया । तीनो बच्चो के शव बंधी से निकलवा लिये गए है जिनके नाम पता क्रमशः 1 अमन बियार पुत्र रामबदन उम्र 8 वर्ष 2 अमरेश चंद्र पुत्र रामबदन उम्र 6 वर्ष 3 सोनू बियार पुत्र नन्दलाल उम्र 7 वर्ष निवासीगण ग्राम चपकी  शक्ति डांड थाना बभनी जनपद सोनभद्र  सूचना पर मौके पहुची बभनी पुलिस ने शव को पानी से बाहर निकलवा कर अग्रिम कार्यवाही मे जुट गई है।

12 हजार किलोमीटर तक फैले साजिश के चक्रव्यूह को डीसीपी विनीत कुमार की टोली के ‘अभिमन्यु’ एसआई राकेश वशिष्ठ ने किया ध्वस्त

पांच राज्यों तक चला दिल्ली पुलिस का अंतरराज्यीय अभियान, गुड्डू बादशाह हत्याकांड में आठ आरोपी गिरफ्तार; अवैध पिस्तौल, मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद डॉ विजय शुक्ल  लोकल न्यूज ऑफ इंडिया  नई दिल्ली।  दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस ने करीब 12 हजार किलोमीटर तक फैले साजिश के चक्रव्यूह को भेदते हुए मोहम्मद इरशाद आलम उर्फ गुड्डू बादशाह हत्याकांड का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार, आईपीएस के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान में ओखला इंडस्ट्रियल एरिया की स्पेशल टास्क फोर्स में तैनात एसआई राकेश वशिष्ठ ने अहम भूमिका निभाई। दिल्ली से तमिलनाडु तक फैली जांच की बिखरी कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने मोबाइल फोन बंद कर लगातार ठिकाने बदले और इंटरनेट एवं हॉटस्पॉट आधारित संचार का सहारा लिया। इसके बावजूद एसआई राकेश वशिष्ठ और उनकी टीम तकनीकी निगरानी तथा जमीनी सूचनाओं के सहारे उनका पीछा करती रही। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु में चले इस अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने लगभग 12 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। 28 जुलाई को हु...