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आखिर क्या हैं तिलिस्म अरावली में बने सूरजगढ़ फार्म्स का, वो वकील साहब थे कौन जो प्रेस कांफ्रेंस में आये थे इसको अवैध बताने जब कोई अंधेरगंध थी नहीं तो, आखिर मुख्यमंत्री जी की खिड़की खुलेगी या बंद ही रहेगी



विजय शुक्ल  
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 
दिल्ली। आजकल शहरी भागदौड़ से दूर शहर में ही लोग गाँव ढूंढते हैं और शायद इसी धंधे का अंदाजा लगाकर अरावली पहाड़ियों में एक फार्म्स बनाया गया सूरजगढ़ फार्म्स के नाम से।  बतौर इसके मालिकान अनिल यादव जी की माने तो यह बाकायदा जीएसटी भरते हैं सरकार को धंधा देते हैं टैक्स के रूप में और जनता को आनंद के जरिये उनसे कमाई भी करते हैं ऐसा वहा होने वाले कमर्शियल कार्यक्रम इवेंट्स और पार्टीज़ के आयोजनों के जरिये समझा जा सकता हैं। 

दरअसल अनिल यादव जी ने हाल में बवाल मचाने के लिए बाक़ायद मीडिया में आये एक वकील श्री नरेंद्र सिंह जी के वाकये को बीस दिन बीता हुआ बताकर लीगल या इल्लीगल सवाल  जबाब ना देने और सब कुछ ठीक ठाक हो जाने का ताजगी और जीत भरा जबाब देकर शायद खुद तो संतुष्ट हो गए पर बिना बताये वो शायद यह जबाब दे गए कि बीस दिन पहले वाला खेल अब ठीक हो चुका हैं और बाकायदा वकील साहब ने इसकी तस्दीक लिखपढकर कर दी हैं कि  मीडिआ और प्रेस कांफ्रेंस करने वाले शायद वो नहीं कोई और था। 


बहरहाल मुख्यमंत्री खिड़की पर सब कुछ बंद करने का यह शायद नायब खेल परदे के पीछे अच्छा लगता हैं और लगना भी  चाहिए क्योकि यह शायद पर्यावरण और नैतिकता के चीर हरण के लिए जरूरी भी हैं  और यहाँ बस बाते कागजी हैं और कागज़ में दर्ज अवैध इतिहास के पन्ने वैध माने जाते हैं।  

अधिकारी हैं और अधिकारियों की अपनी कार्रवाई भी हैं पर सूरजगढ़ जस का तस हैं मजाल या औकात किसी की कि इस पर नजर उठा ले आखिर इस पर नजरे इनायत किसकी हैं और इसकी कमाई कितनी मोटी  हैं. बाकी कालोनियों को बाद में अवैध करार करने वाले अधिकारियों को भी पता हैं कि  इसको बिजली पानी और निर्माण की अनुमति देने के खेल और बड़ा में अवैध करार कर तोड़ने का बड़ा खेल हैं क्या ?
(यह चिट्ठी बस यह बताने के लिए कि न्याय के सिपाही द्वारा की गयी प्रेस कॉनफेरेन्स और इस पत्र का शायद ही कोई वास्ता हो क्योकि उस प्रेस कॉनफेरेन्स में आखिर उनकी जगह था कौन ?)

अब जब वकील साहब ने लिखत पढ़त में अपना काम कर लिया हैं और मालिकाना को क्लीन चिट  दे दी हैं तो मुख्यमंत्री खिड़की , प्रधानमंत्री बेनामी संपत्ति अवैध कब्ज़ा निवारण महकमा या शहर गुरुग्राम के डीटीपी बाठ साहब को क्या जल्दबाजी कि  इस अवैध कब्जे के इलाज का मन बनाये। 

बाकी रही वकील साहब की बात तो उन्होंने फ़ोन उठाया नाम सुना और काट दिया। शायद सवाल जबाब देने का वक़्त नहीं होगा या मन भी नहीं होगा पर सूरजगढ़  फार्म्स के मालिकाना  अनिल यादव जी की कर्कश आवाज ने सब कुछ मैनेज वाली तस्दीक तो कर ही दी कि  जब कोई मुद्दा ही नहीं हैं यह सूरजगढ़ फार्म्स का यह सब तो बीस दिन पुरानी बात हैं। ..... 


टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
Kya khub bahut badhiya sir

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