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दिल्ली में बाढ के हालात, टूटा 45 साल का रिकार्ड

 

  •  बारिश ने तोडा था 45 साल का रिकार्ड
  •  रिंग रोड तक पहुंचा पानी, दिल्ली में बाढ के हालात  

प्रिया बिष्ट,

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया,



नई दिल्ली: वर्ष 2023 दिल्ली की तबाही के लिए याद रखा जाएगा। कुदरत की मार का यह दोहरा असर है कि दिल्ली में मूसलाधार 153 एमएम बरसात ने 40 साल और यमुना से आई बाढ ने 45 साल का रिकार्ड तोड दिया है। गनीमत यह है कि दिल्ली में बरसात नहीं हो रही है। पहाड़ी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश से कल तक गंदा नाला कही जा रही यमुना अब उफनती नदी में तब्दील हो गई। हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी के कारण यमुना नदी खतरे का निशान पार कर बह रही है। गुरूवार तक यमुना नदी, राजधानी के कुछ निचले इलाकों में तबाही का मंजर ला सकती है। जलस्तर बढऩे से करीब एक लाख लोगों के प्रभावित होने की आशंका है। बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन अर्लट पर है।



वहीं यमुना भी अपना रौद्र रूप दिखा रही है। लगातार चार दिन से हथिनी कुंड बैराज से छोड़ा गया लाखों क्यूसेक पानी अब दिल्ली की यमुना नदी में टक्कर मारने लगा है। सोमवार और मंगलवार को तकरीबन आठ लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया था। मंगलवार की रात को भी पानी की छोड़ी गई मात्रा 3 लाख क्यूसेक थी जिसके दिल्ली पहुंचे पर बाढ की स्थिति पैदा होगी। यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 205.33 मीटर को पार कर गया है। हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। 1978 के बाद पहली बार यमुना का जल स्तर 207.71 मीटर हुआ है और आज रात यह 207.83 मीटर के पार करने की संभावना है। यमुना नदी के उफान पर होने और दिल्ली में बाढ कि स्थिति जैसे हालात को देखे तो वर्ष 1978 में हथनीकुंड बैराज से 7 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। उस दौरान यमुना खतरे के निशान से करीब 207.49 बह रही थी। करीब दस साल बाद 1988 में एक बार फिर 5.77 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। वर्ष 1995 में 5.36 लाख क्यूसेक, वर्ष 1998 में 5.41 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस दौरान यमुना का स्तर खतरे के निशान 204.83 मीटर से काफी उपर बह रही थी। 1978 के बाद हरियाणा ने हथनीकुंड बैराज से 2010 में रिकार्ड 7 लाख 44 हजार क्यूसेक के करीब पानी छोड़ा था। इस दौरान यमुना नहीं का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर 207.11 तक पहुंच गया था। कॉमनवेल्थ गेम्स होने के चलते दिल्ली में हर आपदा से निपटने के लिए तैयारियां की गई थी, बावजूद इसके राजधानी में बाढ़ के हालत हो गए थे। कुछ यहीं हालत इस वर्ष भी दिखाई दे रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्र में हुई तबाही के बाद अब नदियों का पानी दिल्ली की यमुना की तरफ बढ़ रहा है ऐसे में हथनीकुंड बैराज से छोड़े गए लाखों क्सूयेक पानी से राजधानी को खतरा हो गया है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा से छोड़ा गया पानी गुरूवार को दोपहर बाद दिल्ली पहुंच जाएगा। जिसके बाद दिल्ली में बाढ़ जैसी स्थित होनेे की आशंका है। विभाग की तरफ से सभी पुख्ता इंतजाम कर लिए गए है।  

बचाव की तैयारी

बाढ़ से बचाव के लिए दिल्ली सरकार ने तैयारी कर ली है। सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग व डीसी ऑफिस के अनुसार यमुना के मुहानों पर नावों को तैनात कर दिया गया है। यमुना खादर इलाके के लोगों को शिविरों में रेस्क्यू कर लाया जा रहा है। दिल्ली के 6 डिस्ट्रिक्ट में करीब 2500 शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में लोगों के लिए रहने, भोजन, पानी, मेडिकल व अन्य जरुरी सुविधाओं का प्रबंध किया गया है। इन शिविरों में लोगों की सुविधा के लिए दरी और गद्दें की भी व्यवस्था की गई है। पूर्वी दिल्ली बाढ़ से ज्यादा प्रभावित है ऐसे में यहाँ करीब 1700 से ज्यादा शिविर स्थापित किए गए है। नार्थ ईस्ट और साउथ ईस्ट में करीब 200 शिविर है।

उस्मानपुर गांव और गढी मांडू गांव में घुसा पानी

जीरो पुस्ता उस्मानपुर और गढी मांडू में यमुना का पानी घुस आया है। क्षेत्रीय विघायक अजय माहवर ने इलाके के लोगों का रेस्क्यू किया है। शिविरों में भेजने की तैयारी हो रही है, लेकिन गांव के लोग घर खाली करने को तैयार नहीं है। विघायक ने सभी से निवेदन किया है कि वे सुरक्षित जगहों पर जाएं।


वर्ष ताजेवाला/हथनीकुंड  खतरे का निशान 

बैराज से छोडा गया पानी

1978 700000 207.49

1979 49053 204.50

1981 128813 204.55

1983 102190 205.95

1986 107074 204.76

1987 32869 202.51

1988 577522 206.92

1989 349161 205.67

1990 146654 205.02

1991 43424 203.36

1992 131464 205.40

1993 127930 205.06

1994 138979 205.36

1995 536188 206.93

1996 129056 206.93

1997 398849 205.88

1998 541700 206.18

1999 255168 205.28

2000 278951 205.60

2001                2,57,481          205.12

2002         3,11,174          205.16

2003                52,078            204.60

2004                81,929            203.72

2005                1,56,418         202.76

2006                 1,56,237        204.10

2007                 1,07,346        204.74

2008                 4,09,876        206.00

2009                 4,20,454        205.33

2010                  7,44,507       207.11

2011                  6,41,462        205.72

2012                  88,127           204.70

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