तीन वर्षों से बदहाल राजकीय प्राथमिक पाठशाला चाटी – 45 मासूम बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर, सरकारी दावों की खुली पोल
लोकेंद्र सिंह वैदिक
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया
कुल्लू. जुलाई 2023 में आई भीषण बारिश ने जहां पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई, वहीं राजकीय प्राथमिक पाठशाला चाटी भी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुई। इस आपदा के कारण विद्यालय का एक कमरा और किचन शेड पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि इस घटना को तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक न तो इनका पुनर्निर्माण हुआ और न ही मरम्मत, जिससे 45 छोटे-छोटे बच्चे आज भी खुले आसमान के नीचे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
विद्यालय की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां केवल एक ही कमरा उपयोग योग्य बचा है, जिसमें अधिकतम दो कक्षाएं ही बैठ सकती हैं, जबकि स्कूल में कुल आठ कक्षाएं संचालित हो रही हैं। परिणामस्वरूप बाकी बच्चों को गर्मी, सर्दी और बारिश—हर मौसम में बाहर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। विशेषकर सर्दी के मौसम में बच्चे ठंड के कारण लगातार बीमार हो रहे हैं और लगभग हर दिन कोई न कोई बच्चा स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है।
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब मध्यान्ह भोजन योजना की बात आती है। किचन शेड के क्षतिग्रस्त होने के कारण बच्चों के लिए भोजन बनाना भी अत्यंत कठिन हो गया है, जिससे उनके पोषण पर सीधा असर पड़ रहा है। यह हालात न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन हैं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।
इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार शिक्षा विभाग, शिक्षा खण्ड अधिकारी निरमण्ड, उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा कुल्लू और ग्राम पंचायत जगातखाना को मौखिक व लिखित रूप से अवगत करवाया जा चुका है। विभागीय अधिकारियों द्वारा निरीक्षण भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह प्रशासनिक उदासीनता का स्पष्ट प्रमाण है।
इस विषय को लेकर शिक्षा मंत्री रोहित सिंह ठाकुर, लाडा (LADA) के अध्यक्ष एवं कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर, तथा मिल्क फेडरेशन के चेयरमैन बुद्धि सिंह ठाकुर तक भी पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन पिछले तीन वर्षों से केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं, धरातल पर कोई कार्य नजर नहीं आ रहा। पंचायत द्वारा प्रस्तावित सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य भी अधर में लटका हुआ है, जो इस लापरवाही को और उजागर करता है।
सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चाटी स्कूल की यह स्थिति उन सभी दावों की पोल खोलती है। अगर मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, अधिकारी और कर्मचारी स्वयं अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाते, तो शायद इन 45 मासूम बच्चों की पीड़ा को समझ पाते और स्थिति इतनी भयावह न होती।
विडंबना यह भी है कि सीमित संसाधनों के बावजूद इस विद्यालय का परीक्षा परिणाम हर वर्ष उत्कृष्ट रहता है। इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह विद्यालय उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। स्कूल के आसपास चार निजी विद्यालय होने के बावजूद 45 बच्चे यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो इस स्कूल और इसके शिक्षकों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक ये मासूम बच्चे धूप, बारिश और ठंड में अपनी पढ़ाई जारी रखने को मजबूर रहेंगे? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनाएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं?
अतः शासन और प्रशासन से पुरजोर मांग की जाती है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए तुरंत धनराशि स्वीकृत की जाए, ताकि क्षतिग्रस्त कमरे और किचन शेड का निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू हो सके। बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और उचित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यदि अब भी ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह न केवल प्रशासन की विफलता होगी, बल्कि इन 45 बच्चों के भविष्य के साथ किया जा रहा खुला अन्याय भी माना जाएगा।


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