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शराब तस्करी कांड से बनारस भाजपा   इकाई हो सकती है भंग, मंत्री से संतरी पर गाज गिरना तय, पीएम की भृकुटी तनी 

शराब तस्करी कांड से बनारस भाजपा   इकाई हो सकती है भंग, मंत्री से संतरी पर गाज गिरना तय, पीएम की भृकुटी तनी 



लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया
वाराणसी, दिल्ली। लॉकडाउन के बीच शहर बनारस इस बार बनारसी पान के कारण नही बल्कि शराब तस्करी में भाजपा पदाधिकारियों का हाथ होने की खबर उछलने का है इसके बाद बीजेपी आलाकमान बेहद नाराज है। सोशल मीडिया पर लोग थू-थू कर रहे हैं और भाजपा के मुखर वक़्ताओ की बोलती बन्द हैं। पीएमओ ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बीजेपी की पूरी जिला इकाई पर गाज गिरना तय है और इसको भंग किया जा सकता है। पीएम के हल्के मे हुआ यह शराब कांड और शराब कांड में बीजेपी नेताओं के शामिल होने की गूंज दिल्ली तक सुनाई दी है। सूत्रों के मुताबिक खुद पीएम मोदी  ने इस खबर का संज्ञान लिया है। बीजेपी शीर्ष नेतृत्व इस बात से हैरान हैं कि लॉकडाउन के बावजूद आखिर कैसे इतनी बड़ी चूक हुई? बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने सिंघम स्टाइल मे एक्शन लेते हुए भाजयुमो के जिलाध्यक्ष को हटाने के साथ ही उनकी पैरवी करने वाले जिला महामंत्री को भी तड़ीपार कर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। माना जा रहा है कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने एक जांच कमेटी बैठाई है। जिसकी रिपोर्ट आते ही कुछ और बड़े नेताओं पर चाबुक चलना तय है।



बनारस में जिस तरह से पार्टी की किरकिरी हुई है, उसे देखते हुए बीजेपी आलाकमान जिला इकाई को भंग करने का मूड बना रही है। संभव है कि नई कार्यकारिणी बनाकर ईमानदार छवि के नेताओं को जगह दी जाए। प्रदेश आलाकमान इस बात से हैरान है कि वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में आखिर कैसे इतनी बड़ी चूक हुई?, वो कौन लोग थे जिन्होंने जिला कार्यकारिणी में शराब तस्करों से संबंध रखने वाले लोगों की पैरवी की?, क्या वर्तमान जिलाध्यक्ष को आरोपी पदाधिकारियों की कारगुजारी की जानकारी नहीं थी ? या जानबूझकर आरोपी पदाधिकारियों के गुनाहों पर पर्दा डाला गया ?
मंत्रियों की फौज फिर भी इतनी बड़ी चूक के पीछे इसको पीएम की छवि धूमिल करने से भी जोडा जा रहा है।
बनारस में मंत्रियों की फौज है।कैबिनेट और स्वतंत्र प्रभार के तीन मंत्रियो के अलावा केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का दखल भी बनारस मे रहता है और तो और संगठन के नाम पर काशी प्रान्त के संगठन मंत्री और अध्यक्ष की मौजूदगी शहर में रहती है। बावजूद इसके पार्टी के जिम्मेदार पदों पर शराब तस्करो से ताल्लुक रखने वाले लोगो को कैसे बैठाया गया। ऐसा हो ही नहीं सकता है कि स्थानीय मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को इस बात की भनक ना लगी हो कि उनकी पार्टी में क्या चल रहा है? बताया जा रहा है कि किसी मंत्री ने अपनी पूरी वीटो पावर लगाकर भाजयुमो के इस जिलाध्यक्ष जिस पर शराब तस्करी के आरोप लगे हैं की नियुक्ति करवायी थी। अब देखना यह है कि क्या यह मंत्री भी खतरे मे आ गये हैं।


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