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साल भर बाद बाप और भाई से मिल छलक पडी शालिकराम की आँखे

 


राजेश सिंह 

लोकल न्यूज आफ इंडिया

बीजपुर , सोनभद्र।  राजस्थान से भटक कर  बीजपुर पहुँचे एक मंदबुद्धि नव युवक को बिजेंद्र उर्फ बग्गा सिंह ने एक साल बाद खोज कर उसके पिता और भाई से जब मिलाया तो तीनों की खुशी का ठिकाना नही रहा। खुशी भी इतनी कि तीनों के आँख से अश्रुधारा फुट पड़ी जिसने भी इस अवसर को देखा तो बाप बेटे और भाई के रिश्ते क्या होते हैं त्रेता युग के रामराज्य की कल्पना करने को मजबूर हो गए। जानकारी के अनुसार शालिक राम गुर्जर उम्र 26 ग्राम गुलखेड़ी,झालावाड़ , राजस्थान दिमाग से कुछ मंदबुद्धि का नवयुवक है वह अपने पिता नन्दलाल के साथ एकसाल पहले दवा कराने जयपुर गया था। जहां से घर वापस होने के समय सालिकराम अपने पिता से बिछड़ गया और भटकते भटकते वह तीन महीने पहले बीजपुर बस स्टेशन आ गया था। उस समय भूंख से छटपटा रहे अंजान युवक पर  बिजेंद्र उर्फ बग्गा सिंह की नजर पड़ी तो पास जाकर उसका हाल जानने की कोशिश की पर भाषा समझ में नही आई तो बग्गा सिंह ने मानवता के नाते उसको खाना खिला कर उसके कपड़े आदि की ब्यवस्था कर दिए और वह उन्ही के यहाँ रहने लगा । इसबीच उन्हों ने कुछ राजस्थानी लोगों से सम्पर्क कराया फिर क्या था  मेहनत रँग लायी और पिछले सप्ताह गुलखेड़ी से बग्गा सिंह को फोन आया सारी स्थिति व्हाट्स एप्प पर फोटो भेज कर पहचान से वाकिफ होने के बाद गुरुवार को युवक के पिता नंदलाल तथा युवक का छोटा भाई अरुण  बीजपुर पहुँचे तो साल भर से  परिवार से बिछड़े सालिकराम के गले पकड़ कर खूब रोए। बाद में बग्गा सिंह ने युवक को नए कपड़े कम्बल,  जूता , मिठाई  रास्ता, खाना, नास्ता रास्ते का खर्च आदि देकर तीनो को राजस्थान भेज दिया। उनके इस इंसानियत की लोग अब प्रशंसा कर रहे हैं। कुछ लोगों ने तो अंत मे अमिताभ बच्चन की "फ़िल्म लावारिस" के गाना " कब के बिछड़े हुए आके  यहाँ हम आज मिले " के सीन  से जोड़ कर कल्पना करने लगे।

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