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माँ हडिंबा अपने लाव-लश्कर के साथ कुल्लू दशरहा में शामिल हो दशरहा का करेगी शुभ आरंभ।

 


राज अग्रवाल 

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 



मनाली:  विश्ब विख्यात धर्मिक स्थल हडिम्बा मंदिर मे आगामी तीन दिन शप्तचंडी का पाठ पूर्ण होने के बाद जगत जननी माँ हडिम्बा अपने लाव- लशकर के साथ कुल्लू दशहरा में शामिल हो कर दशहरे आरम्भ की धोषणा करेंगी।

मनाली हडिम्बा मंदिर में आज से प्रारम्भ शपतचंडी पाठ के बाबत जानकारी देते हुये हडिम्बा मंदिर के कारदार एबम पुजारी रोहित राम शर्मा ब पुजारी लाल चंद शर्मा ब जीत राम शर्मा ने बताया की नबरात्रे के छटे नबरात्रे से आठबें नबरात्रे तक करीब तीन दिन, तीन बारह्मणओ द्रारा शपतचंडी पाठ का आयोजन किया जाता  है। तथा नबरात्रे के नौमी नबरात्रे में  माँ हडिम्बा की पालकी  अपने कारकरिंदो के साथ कुल्लू की ओर प्रस्थान करती हैं।

सनद रहे की  जगह - जगह जंहा  माँ के स्बागत एबम पूजन हेतु श्रदालु गण नजरें बिछाये हुये रहते हैं बहीं माँ की पालकी पैदल कुल्लू तक का सफर पूर्ण करती हैं।

उन्होंने बताया की माँ हडिम्बा की पालकी कल मनाली गांब से ढूंगरी गांब में आयंगी और दो दिन हडिम्बा मंदिर में रहने के बाद नौमी को कुल्लू की ओर प्रस्थान करेंगी।

 कुल्लू प्रस्थान से पूर्ब माँ हडिम्बा सर्ब प्रथम अपने पुत्र धटोत्कच्छ को साथ चलने एबम आबान स्बरूप धटोत्कच्छ के पूजन स्थल मे जाती हैं तथा धाटी के अन्य देबी - देबताओं को साथ चलने एबम दशहरे के सम्पन्न करने हेतु आवाहन करती हैं।

बिगत रहे की देश के अन्य भागों की तुलना में कुल्लू का दशहरा नबरात्रे के अंतिम नबरात्रे में आरम्भ होता है तथा करीब एक सप्ताह तक बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है इस बर्ष कुल्लू दशहरा में करीब 332 देबी - देबताओं को जिला प्रशासन द्रारा आंमत्रित किया गया है।

धाटी की प्रमुख देबी एबम कुल्लू राजधाराने की कुल दादी हडिम्बा नौमी को मनाली से प्रस्थान करने के बाद दशमी को रामशीला के हनुमान मंदिर में राजधाराने के आमत्रंण के पश्चात रूपी महल की ओर कूच करती हैं

सन्द रहे की हडिम्बा माँ  धाटी में एक मात्र देबी हैं जिन्हें राजधाराने द्रारा आमत्रंण भेजा जाता है तथा महल में बिश्राम स्बरूप कमरा प्रदान किया  जाता है।

रूपी महल में राज परिवार द्वारा धोड़ी पूजन के पश्चात माँ हडिम्बा की पालकी को राजभबन से बाहर आकर राजपरिबार को शुभ बचन देने के उपरांत ढालपुर की ओर रबाना होती है। तथा दोपहर पश्चात ढालपुर में दशहरे के आगमन की धोषणा करती हैं।

 करीब सात दिन कुल्लू के ढालपुर में ब्यतीत करने के बाद माँ हडिम्बा की पालकी मनाली की ओर बापिसी  करती हैं किन्तु एक दिन के सफर की तुलना बापिसी में एक रात्रि का बिश्राम कटरांई में गौड निवास में करती हैं।

एक रात्रि ब्यतीत करने के बाद कटरांई से मनाली का सफर आरम्भ हो जाता है।

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