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बाराबंकी जिले में सुभासपा का सामाजिक विस्तार, संजय तिवारी की एंट्री से नए समीकरणों की चर्चा



प्रिया बिष्ट 

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 

बाराबंकी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओमप्रकाश राजभर और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अब केवल एक क्षेत्रीय या जातीय राजनीति तक सीमित दल नहीं माने जा रहे, बल्कि ब्राह्मण, पिछड़े, अति पिछड़े, दलित और गरीब तबकों के बीच तेजी से उभरते नए सामाजिक-राजनीतिक भरोसे के केंद्र के रूप में देखे जा रहे हैं। इसी कड़ी में बाराबंकी के चर्चित सामाजिक चेहरे संजय तिवारी का सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी में शामिल होना जिले की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट माना जा रहा है।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बाराबंकी लंबे समय से पारंपरिक जातीय और दलगत समीकरणों के आधार पर राजनीति का केंद्र रहा है, लेकिन अब जमीन पर सामाजिक असंतोष और नए विकल्प की तलाश तेजी से बढ़ रही है। ऐसे माहौल में संजय तिवारी जैसे ब्राह्मण चेहरे का सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से जुड़ना केवल एक व्यक्ति की जॉइनिंग नहीं, बल्कि जिले में नए सामाजिक समीकरण गढ़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


संजय तिवारी ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण करते हुए कहा कि गरीब, मेहनतकश और उपेक्षित समाज के मन को पढ़ने और उन्हें सम्मान देने की राजनीति यदि कोई कर रहा है तो वह ओमप्रकाश राजभर हैं। उन्होंने कहा कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अब केवल एक समाज की नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की आवाज बनती दिख रही है जिन्हें वर्षों तक केवल वोट बैंक समझा गया।


बाराबंकी की राजनीति में दलित, गैर-यादव पिछड़े, अति पिछड़े और गरीब सवर्ण मतदाताओं की बड़ी भूमिका मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अब इन्हीं वर्गों के बीच अपनी पैठ मजबूत कर “सामाजिक सम्मान बनाम पारंपरिक राजनीति” का नया नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश में जुटी दिखाई दे रही है।


राजनीतिक गलियारों में इस पूरे सामाजिक विस्तार के पीछे डॉ. अरविंद राजभर की सक्रिय संगठनात्मक भूमिका को भी अहम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि डॉ. अरविंद राजभर नई पीढ़ी, गरीब सवर्ण समाज, छोटे सामाजिक समूहों और युवाओं को जोड़कर ओमप्रकाश राजभर की राजनीति को एक व्यापक सामाजिक और “नेक्स्ट जेनरेशन एक्सटेंशन” देने की दिशा में काम कर रहे हैं। वहीं ओमप्रकाश राजभर का लंबा राजनीतिक अनुभव और जमीन आधारित शैली इस पूरी रणनीति की मुख्य ताकत मानी जा रही है।


विशेषज्ञों का मानना है कि गरीब सवर्ण वर्ग आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा बदलने वाला बड़ा कारक बन सकता है। यही वजह है कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अब केवल पारंपरिक पिछड़ी राजनीति तक सीमित न रहकर आर्थिक और सामाजिक उपेक्षा झेल रहे सभी वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।


माना जा रहा है कि अवध क्षेत्र में इस तरह के सामाजिक जुड़ाव यदि तेजी से बढ़ते हैं, तो आने वाले चुनावों में बाराबंकी समेत कई जिलों की राजनीति का पारंपरिक गणित बदल सकता है।

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