राष्ट्र रक्षा एवं भारत कल्याण हेतु तपोवन आश्रम में हुआ ‘सवा लाख तण्डुल शिवलिंग महायज्ञ’ का भव्य आयोजन
महादेव की आराधना से राष्ट्र कल्याण का संकल्प, खगोलीय एवं ज्योतिषीय नकारात्मक प्रभावों के शमन हेतु हुआ महायज्ञ
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया
प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज के झूंसी स्थित तपोवन आश्रम में गुरुवार को राष्ट्र रक्षा, भारत कल्याण, सनातन धर्म के संरक्षण, विश्व शांति एवं जनकल्याण की कामना से भव्य "सवा लाख तण्डुल शिवलिंग महायज्ञ" का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य संपन्न हुआ। पूज्य आचार्य हरि कृष्ण शुक्ल गुरुजी के सान्निध्य में आयोजित इस दिव्य महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं एवं धर्मप्रेमियों ने सहभागिता कर भगवान शिव का पूजन-अर्चन किया।
आचार्य हरि कृष्ण शुक्ल गुरुजी ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व एवं भारत विभिन्न प्रकार की खगोलीय और ज्योतिषीय चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में वैदिक यज्ञ एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान नकारात्मक ऊर्जाओं और अशुभ प्रभावों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महायज्ञ का सकारात्मक प्रभाव आगामी 15 दिनों के भीतर भारतवर्ष में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगेगा तथा राष्ट्र के लिए शुभ एवं कल्याणकारी परिस्थितियों का निर्माण होगा।
महायज्ञ के दौरान सवा लाख तण्डुल (चावल) से शिवलिंगों का निर्माण कर वैदिक विधि-विधान के साथ पूजन, दिव्य रुद्राभिषेक एवं विशेष अनुष्ठान संपन्न कराए गए। पूरे आश्रम परिसर में "हर-हर महादेव" और वैदिक मंत्रों की गूंज से भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया।
इस अवसर पर आचार्य हरि कृष्ण शुक्ल गुरुजी ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और विश्व शांति के लिए आध्यात्मिक जागरण अत्यंत आवश्यक है। सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं मानवता के कल्याण हेतु ऐसे धार्मिक आयोजनों की भूमिका सदैव प्रेरणादायी रही है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से राष्ट्रहित, समाजहित और मानव कल्याण के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
महायज्ञ के उपरांत विशाल महाभंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन शक्ति, राष्ट्रीय चेतना और जनकल्याण का एक विराट अभियान है, जिसका उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करना है।
कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, संत-महात्माओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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