कृषि मंत्री चन्द्र कुमार ने प्रसिद्ध बागवान नकुल खुल्लर को बागवानी उत्कृष्टता सम्मान से किया सम्मानित
डीसी कौशल
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया
मनाली।हिमाचल प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन मंत्री चन्द्र कुमार ने किसान मेले के दौरान मनाली के प्रतिष्ठित पर्यटन उद्यमी एवं प्रगतिशील बागवान नकुल खुल्लर को "बागवानी उत्कृष्टता" पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें बागवानी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान और उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदान किया गया।
नकुल खुल्लर का परिवार लंबे समय से कुल्लू-मनाली के प्रतिष्ठित बागवान परिवारों में गिना जाता रहा है। बागवानी उनके लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक विरासत है। अपने पिता से मिले संस्कारों और अनुभवों को आगे बढ़ाते हुए नकुल खुल्लर ने उसी राह को अपनाया और आधुनिक सोच के साथ उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास किया। आज मनाली की मनमोहक वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच उन्होंने बागवानी की एक ऐसी दुनिया बसाई है, जो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई देती है।
मनाली में पर्यटन उद्योग के अग्रणी उद्यमियों में शुमार होने के बावजूद उनका बागवानी से गहरा जुड़ाव यह दर्शाता है कि पहाड़ की असली पहचान उसकी धरती और उससे जुड़ी मेहनत में निहित है। सेब और अन्य फलों के बागों के प्रति उनका समर्पण नई पीढ़ी को यह संदेश देता है कि सफलता केवल शहरों और कॉर्पोरेट दुनिया में ही नहीं, बल्कि खेतों और बागों में भी हासिल की जा सकती है।
कुल्लू-मनाली क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बागवानी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। जानकारों के अनुसार क्षेत्र में आय के सबसे बड़े स्रोतों में बागवानी शीर्ष पर है, जबकि उसके बाद पर्यटन और होटल व्यवसाय का स्थान आता है। ऐसे में नकुल खुल्लर जैसे सफल उद्यमी और बागवान का सम्मान इस बात का संकेत है कि बागवानी आज भी हिमाचल की आर्थिक रीढ़ बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि वर्तमान समय में जब युवा वर्ग नशे जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब नकुल खुल्लर जैसे उदाहरण उन्हें सकारात्मक दिशा दिखा सकते हैं। यदि युवा आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ बागवानी को अपनाएं तो यह न केवल सम्मानजनक रोजगार का माध्यम बन सकती है, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर सकती है।
किसान मेले में मिला "बागवानी उत्कृष्टता" पुरस्कार केवल नकुल खुल्लर की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उस पारिवारिक विरासत, मेहनत और दूरदृष्टि का सम्मान है जिसने मनाली की वादियों में बागवानी को एक नई पहचान देने का काम किया है। यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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