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डेढ़ लाख बच्चों को पढ़ाने वाले सम्मानित शिक्षक की गली का ये हाल, दो साल से नहीं जागी नगर पंचायत

 



रेडियो चैनल से लेकर न्यूज चैनलों तक आवाज पहुंचाने वाले शिक्षक दो साल से सड़क और जलनिकासी के लिए लगा रहे गुहार, फिर भी जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी


बिधूना। नगर पंचायत बिधूना के अंबेडकर नगर में विकास के दावों की तस्वीर इन दिनों जमीन पर साफ दिखाई दे रही है। यहां रहने वाले चर्चित शिक्षक ठाकुर सत्यदेव सिंह सेंगर की गली में न सड़क बनी है और न ही जलनिकासी की समुचित व्यवस्था। बारिश होते ही रास्ते तालाब में तब्दील हो जाते हैं और लोगों को पानी व कीचड़ के बीच से निकलने को मजबूर होना पड़ता है।


सबसे हैरानी की बात यह है कि यह समस्या आज की नहीं है। पिछले करीब दो वर्षों से शिक्षक महोदय लगातार प्रार्थना पत्र देकर और सूचना देकर जिम्मेदारों को समस्या से अवगत करा रहे हैं। इसके बावजूद हालात जस के तस हैं। अब पिछले दो दिनों से शिक्षक सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी आवाज लगातार उठा रहे हैं।


रेडियो से न्यूज चैनलों तक पहुंची आवाज, दिल्ली में भी मिल चुका सम्मान




ठाकुर सत्यदेव सिंह सेंगर केवल अपने क्षेत्र तक सीमित रहने वाले शिक्षक नहीं हैं। रेडियो चैनलों से लेकर न्यूज चैनलों तक अपनी आवाज और शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से पहचान बनाने वाले शिक्षक को दिल्ली जैसे बड़े शहरों में कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। सोशल मीडिया के माध्यम से वे करीब एक से डेढ़ लाख बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का कार्य करते हैं।


विडंबना देखिए—जो शिक्षक हजारों-लाखों बच्चों को शिक्षा और जागरूकता की राह दिखा रहा है, उसे अपने ही मोहल्ले में एक अदद सड़क और जलनिकासी व्यवस्था के लिए दो वर्षों से सरकारी तंत्र के सामने गुहार लगानी पड़ रही है।


अध्यक्ष जी, आखिर कब जागेंगे?


बताया गया है कि शिक्षक द्वारा जिले के संबंधित मंत्रियों और नगर पंचायत अध्यक्ष को भी समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। सवाल सीधा है—जब दो साल से लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं तो आखिर जिम्मेदारों की नींद क्यों नहीं टूट रही?


मौके की तस्वीरें खुद बदहाली की कहानी कह रही हैं। कहीं सड़क का नामोनिशान नहीं, कहीं गंदा पानी जमा है, तो कहीं कीचड़, घास-फूस और कचरे ने रास्ते को मुश्किल बना रखा है। बारिश के दिनों में यह स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए परेशानी के साथ-साथ दुर्घटना का खतरा भी पैदा कर रही है।


जब सम्मानित शिक्षक की नहीं सुनी जा रही, तो आम जनता की कौन सुनेगा?


एक तरफ शिक्षक को बड़े शहरों में सम्मान मिलता है, रेडियो और न्यूज चैनलों तक उनकी आवाज पहुंचती है और वे बड़ी संख्या में बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। दूसरी तरफ अपने ही शहर में मूलभूत सुविधाओं के लिए उनकी आवाज जिम्मेदारों के दरवाजे पर अटक गई है।


अब सवाल सिर्फ ठाकुर सत्यदेव सिंह सेंगर का नहीं है। सवाल अंबेडकर नगर और बिधूना की उन तमाम गलियों का है, जहां बारिश आते ही लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है।


नगर पंचायत आखिर किस दिन जागेगी?

क्या सड़क और नाली के लिए भी किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?

क्या दो साल की शिकायतों के बाद भी जनता को सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहेगा?


जनता को विकास के दावे नहीं, जमीन पर सड़क और जलनिकासी चाहिए।

और अब बिधूना की जनता का सवाल साफ है—“आखिर कब जागेंगे अध्यक्ष जी?”

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