12 हजार किलोमीटर तक फैले साजिश के चक्रव्यूह को डीसीपी विनीत कुमार की टोली के ‘अभिमन्यु’ एसआई राकेश वशिष्ठ ने किया ध्वस्त
पांच राज्यों तक चला दिल्ली पुलिस का अंतरराज्यीय अभियान, गुड्डू बादशाह हत्याकांड में आठ आरोपी गिरफ्तार; अवैध पिस्तौल, मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद
डॉ विजय शुक्ल
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया
नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस ने करीब 12 हजार किलोमीटर तक फैले साजिश के चक्रव्यूह को भेदते हुए मोहम्मद इरशाद आलम उर्फ गुड्डू बादशाह हत्याकांड का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार, आईपीएस के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान में ओखला इंडस्ट्रियल एरिया की स्पेशल टास्क फोर्स में तैनात एसआई राकेश वशिष्ठ ने अहम भूमिका निभाई। दिल्ली से तमिलनाडु तक फैली जांच की बिखरी कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों ने मोबाइल फोन बंद कर लगातार ठिकाने बदले और इंटरनेट एवं हॉटस्पॉट आधारित संचार का सहारा लिया। इसके बावजूद एसआई राकेश वशिष्ठ और उनकी टीम तकनीकी निगरानी तथा जमीनी सूचनाओं के सहारे उनका पीछा करती रही। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु में चले इस अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने लगभग 12 हजार किलोमीटर की दूरी तय की।
28 जुलाई को हुई थी हत्या
घटना 28 जुलाई 2026 की है। पुलिस को पुल प्रह्लादपुर के लाल कुआं स्थित चुंगी नंबर-3 के डी-29 परिसर में गोलीबारी की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस को मोहम्मद इरशाद आलम उर्फ गुड्डू बादशाह मृत मिले, जबकि मोहम्मद फारुख गोली लगने से घायल अवस्था में मिला।
क्राइम टीम और एफएसएल टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके से खून से सने नमूने, खाली एवं जिंदा कारतूस तथा धातु के प्रक्षेप्य बरामद कर कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त किए गए।
घायल बनकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
शुरुआत में मोहम्मद फारुख ने स्वयं को हमले में घायल हुआ निर्दोष पीड़ित बताया। हालांकि, विस्तृत पूछताछ, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, तकनीकी निगरानी, क्षेत्रीय सूचनाओं और अन्य साक्ष्यों की जांच में उसके बयानों में कई विरोधाभास सामने आए।
पुलिस का दावा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कथित साजिश में फारुख की भूमिका उजागर होती गई। आरोप है कि उसने गुड्डू बादशाह का विश्वास हासिल किया और पुराने विवाद का समझौता कराने के बहाने उसे लाल कुआं स्थित किराये के परिसर तक पहुंचाया। उस पर दूसरे आरोपियों के साथ समन्वय करने और बाद में स्वयं को घायल पीड़ित बताकर पुलिस को भ्रमित करने का भी आरोप है। साजिश में भूमिका सामने आने के बाद उसे घटना वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया।
समझौते के नाम पर बिछाया गया जाल
जांच में हत्या के पीछे बिहार के सुपौल जिले से जुड़ी पुरानी रंजिश सामने आई है। पुलिस के अनुसार, मृतक गुड्डू बादशाह का आरोपी मोहम्मद शमशाद और मोहम्मद अशफाक के साथ पुराना विवाद था।
आरोप है कि इसी विवाद को समाप्त करने और समझौता कराने के बहाने गुड्डू को बिहार से दिल्ली बुलाया गया। कथित समझौता बैठक को एक जाल के रूप में इस्तेमाल किया गया और इसके बाद उसे लाल कुआं स्थित किराये के परिसर अथवा गोदाम में ले जाकर गोली मार दी गई।
पुलिस का कहना है कि यह अचानक हुई वारदात नहीं, बल्कि कथित रूप से पहले से तैयार की गई योजना का हिस्सा थी। साजिश में शामिल आरोपियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। किसी ने मृतक का विश्वास जीता, किसी ने आरोपियों को एकत्र किया, तो किसी ने उनके ठहरने, परिवहन और हथियार छिपाने की व्यवस्था की। कुछ आरोपियों पर गोलीबारी करने और वारदात के बाद साक्ष्य हटाने का आरोप है।
हत्याकांड में आठ आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में पुल प्रह्लादपुर निवासी मोहम्मद फारुख (27), बिहार के सुपौल निवासी मोहम्मद आफताब, साहिबाबाद निवासी मोहम्मद इरफान (23), सुपौल निवासी मोहम्मद शमशाद (28), मोहम्मद अशफाक (23), मोहम्मद रहमतुल्लाह उर्फ छोटू (22), मोहम्मद शोएब अख्तर और लाल कुआं निवासी अमन यादव (25) को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, शमशाद कथित साजिश के प्रमुख सूत्रधारों में शामिल है। वह इंटरनेट आधारित माध्यमों से अन्य आरोपियों के संपर्क में था। अशफाक पर भी योजना और समन्वय में शामिल रहने का आरोप है। दोनों के डिजिटल एवं संचार संपर्कों की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, शमशाद और अशफाक का आपराधिक रिकॉर्ड भी है। दोनों की बिहार के सुपौल में दर्ज हत्या के एक मामले में कथित संलिप्तता बताई गई है।
तमिलनाडु के तिरुपुर तक पहुंची पुलिस
मोहम्मद आफताब पर सह-आरोपियों से समन्वय करने तथा कथित हमलावर दल की आवाजाही और एकत्रीकरण में सहायता करने का आरोप है। वारदात के बाद वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। पुलिस ने तकनीकी एवं जमीनी सूचनाओं के आधार पर उसका पीछा किया और तमिलनाडु के तिरुपुर से स्थानीय पुलिस की सहायता से उसे गिरफ्तार कर लिया।
मोहम्मद शोएब अख्तर पर कथित हमलावर दल के सदस्यों के साथ तमिलनाडु से दिल्ली आने और वारदात के बाद भी सह-आरोपियों से जुड़े रहने का आरोप है। मोहम्मद रहमतुल्लाह उर्फ छोटू पर योजनाबद्ध हमले को अंजाम देने तथा बाद में साक्ष्य अथवा अन्य सामग्री हटाने या छिपाने में सहयोग करने का आरोप लगाया गया है।
एसआई राकेश वशिष्ठ ने जोड़ीं साजिश की कड़ियां
इस चुनौतीपूर्ण जांच में ओखला इंडस्ट्रियल एरिया की स्पेशल टास्क फोर्स के एसआई राकेश वशिष्ठ की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए मोबाइल फोन बंद कर दिए थे। वे लगातार ठिकाने बदलने के साथ इंटरनेट और हॉटस्पॉट आधारित माध्यमों से कथित रूप से आपसी संपर्क कर रहे थे।
ऐसे में एसआई राकेश वशिष्ठ और उनकी टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट आधारित संचार, संदिग्धों की लोकेशन, यात्राओं और गतिविधियों का विश्लेषण किया। सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय सत्यापन, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और क्षेत्रीय सूचनाओं को आपस में जोड़कर आरोपियों के संभावित ठिकानों की पहचान की गई।
पांच राज्यों में फैली कार्रवाई के दौरान संबंधित स्थानीय पुलिस इकाइयों के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया। करीब 12 हजार किलोमीटर लंबे अभियान में एसआई राकेश वशिष्ठ और एसटीएफ ने आरोपियों के बदलते ठिकानों का पीछा करते हुए कथित साजिश की कड़ियों को सामने लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अमन यादव पर गोलीबारी में शामिल होने का आरोप
पुलिस का दावा है कि लाल कुआं निवासी अमन यादव ने घटनास्थल के पास आरोपियों के ठहरने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में सहायता की थी। बाद में आर्थिक लाभ का प्रस्ताव मिलने पर वह कथित रूप से साजिश में शामिल हो गया।
घटना वाली रात अमन कथित तौर पर आफताब, रहमतुल्लाह और शोएब को अपनी मोटरसाइकिल पर लेकर गया। पुलिस ने उस पर गोलीबारी में शामिल होने का भी आरोप लगाया है। उसके द्वारा कथित रूप से छिपाए गए हथियार और मामले से जुड़ी अन्य सामग्री की तलाश की जा रही है।
इरफान की निशानदेही पर अवैध पिस्तौल बरामद
साहिबाबाद निवासी मोहम्मद इरफान पर वारदात के बाद आरोपियों को आश्रय देने और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि उसने अवैध हथियार और कारतूस भी छिपाए थे।
इरफान की निशानदेही पर पुलिस ने एक अवैध पिस्तौल, एक अतिरिक्त मैगजीन और जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बरामद हथियार और कारतूस को बैलिस्टिक एवं फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है, ताकि हत्याकांड से उनके संभावित संबंध का पता लगाया जा सके।
विनीत कुमार की रणनीति, राकेश वशिष्ठ की जमीनी कार्रवाई
दक्षिण-पूर्वी जिले के पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार, आईपीएस के निर्देशन और निगरानी में विभिन्न पुलिस टीमों के बीच समन्वय स्थापित किया गया। डीसीपी विनीत कुमार की रणनीतिक निगरानी और एसआई राकेश वशिष्ठ के नेतृत्व में हुई जमीनी एवं तकनीकी कार्रवाई ने इस अंतरराज्यीय अभियान को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया।
आरोपियों के लगातार ठिकाने बदलने और आधुनिक संचार माध्यमों के इस्तेमाल के कारण जांच बेहद चुनौतीपूर्ण थी। इसके बावजूद तकनीकी विश्लेषण, जमीनी खुफिया जानकारी और पांच राज्यों की पुलिस के साथ तालमेल के आधार पर एक-एक कर आठों आरोपियों तक पुलिस पहुंचने में सफल रही।
दो और अवैध हथियारों की तलाश
पुलिस अब आरोपी अमन यादव और फारुख द्वारा कथित रूप से छिपाए गए दो अतिरिक्त अवैध हथियारों तथा मामले से जुड़ी अन्य सामग्री की बरामदगी में जुटी है। जांच एजेंसी हत्या में इस्तेमाल हथियारों, परिवहन व्यवस्था, आरोपियों के डिजिटल संपर्कों और घटनाक्रम की पूरी समयरेखा स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
सभी आठ आरोपियों को अदालत में पेश किया जा चुका है। शेष साक्ष्यों की बरामदगी, वैज्ञानिक एवं स्वतंत्र प्रमाणों के आधार पर घटनाक्रम की पूरी कड़ी स्थापित करने और साजिश में शामिल अन्य संभावित लोगों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में यह वारदात पुरानी रंजिश के चलते रची गई कथित सुनियोजित आपराधिक साजिश का परिणाम प्रतीत होती है। आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगी।


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें