योग प्रमाणन मंडल ने दी प्रतिष्ठित मान्यता; 11 व्यावसायिक श्रेणियों में प्रशिक्षण और अपने विद्यार्थियों के मूल्यांकन का मिला अधिकार
डॉ विजय शुक्ल
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया
बेंगलुरु। भारतीय योग परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में सक्रिय अक्षर योग केंद्र ने एक महत्वपूर्ण संस्थागत उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत योग प्रमाणन मंडल (Yoga Certification Board) ने संस्था को “लीडिंग योगा इंस्टीट्यूशन” के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह प्रमाणन 3 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ है और निर्धारित शर्तों के अधीन 2 सितंबर 2034 तक वैध रहेगा।
योग प्रमाणन मंडल द्वारा जारी प्रमाणपत्र संख्या YL26000001 के अनुसार, अक्षर योग केंद्र को योग शिक्षा, प्रशिक्षण और निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रशिक्षुओं के मूल्यांकन के लिए अधिकृत किया गया है। यह मान्यता संस्था की प्रशिक्षण क्षमता, शैक्षणिक व्यवस्था और योग प्रमाणन मंडल द्वारा तय मापदंडों के अनुपालन के आधार पर दी गई है।
अक्षर योग केंद्र के लिए यह उपलब्धि केवल एक प्रशासनिक प्रमाणन नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही योग साधना, प्रशिक्षण और वैश्विक विस्तार की संस्थागत स्वीकार्यता मानी जा रही है।
सिद्ध योगी अक्षर महाराज की साधना को संस्थागत पहचान
अक्षर योग केंद्र ने इस उपलब्धि का श्रेय हिमालयन सिद्ध योगी अक्षर महाराज के दीर्घकालीन समर्पण और मार्गदर्शन को दिया है। संस्था के अनुसार, सिद्ध योगी अक्षर महाराज ने योग, स्वास्थ्य, आध्यात्मिकता और मानव कल्याण से जुड़ी भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने के लिए वर्षों तक निरंतर कार्य किया।
उनके नेतृत्व में अक्षर योग केंद्र ने योग को केवल शारीरिक अभ्यास तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अनुशासन, मानसिक संतुलन, आध्यात्मिक चेतना और जीवन-पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया। संस्था का कहना है कि उसके प्रशिक्षण कार्यक्रमों से विभिन्न देशों और सामाजिक पृष्ठभूमियों के लोग जुड़े तथा योग शिक्षकों की एक नई पीढ़ी तैयार हुई।
यह मान्यता सिद्ध योगी अक्षर महाराज द्वारा हिमालयन सिद्ध योग को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के अभियान को भी नई शक्ति प्रदान करती है।
11 श्रेणियों में प्रशिक्षण देने का अधिकार
“लीडिंग योगा इंस्टीट्यूशन” के रूप में अक्षर योग केंद्र को योग प्रमाणन मंडल द्वारा निर्धारित 11 व्यावसायिक श्रेणियों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार मिला है। इनमें शामिल हैं—
* योग वालंटियर
* योग प्रोटोकॉल इंस्ट्रक्टर
* योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर
* प्राथमिक एवं प्रारंभिक विद्यालय योग शिक्षक
* उच्च माध्यमिक विद्यालय योग शिक्षक
* योग शिक्षक एवं मूल्यांकनकर्ता
* योग मास्टर
* सहायक योग चिकित्सक
* योग चिकित्सक
* चिकित्सीय योग सलाहकार
* योगासन प्रशिक्षक
इसके साथ ही संस्था अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पंजीकृत और प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का निर्धारित नियमों के अनुसार मूल्यांकन भी कर सकेगी। हालांकि यह मूल्यांकन अधिकार संस्था के स्वयं के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नामांकित अभ्यर्थियों तक सीमित रहेगा।
यह अधिकार अक्षर योग केंद्र की भूमिका को सामान्य प्रशिक्षण संस्थान से आगे ले जाकर एक जिम्मेदार योग शिक्षा एवं मूल्यांकन केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
गुरु-शिष्य परंपरा और हिमालयी विरासत को समर्पित उपलब्धि
अक्षर योग केंद्र ने इस उपलब्धि को अपने पूज्य गुरुओं, हिमालयी सिद्ध परंपरा और गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित किया है। संस्था का मानना है कि भारतीय योग की प्रामाणिकता पुस्तकों या प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है। यह वह जीवंत ज्ञान है, जिसे सदियों से गुरु अपने शिष्यों को अनुभव, साधना और अनुशासन के माध्यम से सौंपते आए हैं।
संस्था के अनुसार, बाबा बालकनाथ की सिद्ध परंपरा से प्रेरित और योग विधा से सिंचित सिद्ध योगी अक्षर महाराज ने इसी आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था और वैश्विक संवाद से जोड़ने का प्रयास किया है। इसलिए यह मान्यता किसी एक व्यक्ति अथवा संस्थान की उपलब्धि से आगे बढ़कर भारतीय योग की हिमालयी परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
हिमालय यात्रा के समय मिला ऐतिहासिक समाचार
इस उपलब्धि के साथ एक भावनात्मक और आध्यात्मिक संयोग भी जुड़ा है। अक्षर योग केंद्र की टीम को मान्यता मिलने का समाचार 3 सितंबर 2026 को उस समय प्राप्त हुआ, जब वह महाहिमालय की पवित्र यात्रा के लिए प्रस्थान कर रही थी।
संस्था ने इस संयोग को अपने गुरुओं और हिमालय का आशीर्वाद बताया है। टीम के सदस्यों के लिए यह क्षण इसलिए भी विशेष रहा, क्योंकि जिस हिमालयी ज्ञान परंपरा को संस्था वर्षों से विश्व के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने में लगी है, उसी हिमालय की यात्रा के आरंभ पर उसे राष्ट्रीय स्तर की यह महत्वपूर्ण संस्थागत मान्यता मिली।
सम्मान के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
अक्षर योग केंद्र ने कहा है कि “लीडिंग योगा इंस्टीट्यूशन” का दर्जा गौरव के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आया है। इस मान्यता के बाद संस्था से योग शिक्षा, प्रशिक्षकों की गुणवत्ता, मूल्यांकन की पारदर्शिता, अनुसंधान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में और ऊंचे मानकों की अपेक्षा की जाएगी।
संस्था ने योग प्रमाणन मंडल, आयुष मंत्रालय और इससे संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग को विश्वव्यापी स्वास्थ्य और मानव कल्याण आंदोलन के रूप में स्थापित करने के प्रयासों की सराहना की है।
अक्षर योग केंद्र ने केंद्रीय आयुष नेतृत्व, योग प्रमाणन मंडल के अध्यक्ष एवं आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा तथा योग प्रमाणन मंडल के संस्थान प्रमुख डॉ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत सहित सभी अधिकारियों और सदस्यों के प्रति भी आभार प्रकट किया है।
प्रमाणपत्र नहीं, वैश्विक संकल्प
अक्षर योग केंद्र के लिए यह प्रमाणन एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन संस्था इसे यात्रा का अंतिम लक्ष्य नहीं मानती। उसका संकल्प प्रामाणिक योग शिक्षा, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, अनुशासित मूल्यांकन और हिमालयी आध्यात्मिक ज्ञान को दुनिया के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का है।
संस्था ने कहा है कि वह इस मान्यता से जुड़े भरोसे की रक्षा करते हुए योग शिक्षा और सेवा में उच्चतम मानक बनाए रखेगी।
यह उपलब्धि एक प्रमाणपत्र से कहीं आगे है। यह एक सिद्ध परंपरा की संस्थागत पहचान, दशकों की साधना का सम्मान और विश्व के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी का आरंभ है। सिद्ध योगी अक्षर महाराज के नेतृत्व में अक्षर योग केंद्र ने हिमालयन सिद्ध योग को जो उड़ान दी है, उसे अब भारत सरकार की अधिकृत प्रमाणन व्यवस्था से नई पहचान और नया आकाश मिला है।

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