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संस्कृति विवि के फिजियो थैरेपी विभाग ने मास्क के प्रभाव का किया सर्वे

संस्कृति विवि के फिजियो थैरेपी विभाग ने मास्क के प्रभाव का किया सर्वे



सँस्कृति  स्कूल आफ मेडिकल एंड एलाइड साइंसेज के फार्मेसी विभाग की टीम लोगों का परीक्षण करती हुई और सामन्य जानकारियां देती हुई


 


रिटायर्ड लेफ्टिनेंट बच्चू सिंह


लोकल न्यूज ऑफ़ इंडिया 


मथुरा। विश्वव्यापी महामारी कोरोना ने अपने देश में भी कोहराम मचाना शुरू कर दिया है। सरकारी हिदायतों के बावजूद इसके प्रसार को रोक पाना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में कोरोना से बचाव के लिए अपने जा रहे साधन लोगों के लिए कहीं कोई बड़ी समस्या तो नहीं बनने जा रहे, इसका पता लगाना भी जरूरी हो गया है। संस्कृति स्कूल आफ मेडिकल एंड एलाइड साइंसेज के फिजियोथ्रैपी विभाग ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। संस्कृति फार्मेसी स्कूल द्वारा इन दिनों इस्तेमाल किए जा रहे मास्क के दुष्प्रभावों को जानने के लिए व्यापक सर्वे शुरू किया है। 
संस्कृति स्कूल आफ मेडिकल एंड एलाइड साइंसेज के फार्मेसी विभाग की सहायक प्रोफेसर डा. प्रेक्षा शर्मा और डा. ख्याति वार्ष्णेय ने बताया कि उन्होंने जगह-जगह जाकर लगभग 100 लोगों का परीक्षण किया जो लंबे समय से मास्क का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सर्वे में सामने आया है कि कोविड-19 से जूझते हुए उन्हें मास्क के कारण पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिल पाती जिसके कारण सांस लेने के अलावा ह्रदय संबंधी, मांसपेशियों तथा मानसिक विकारों का भी सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस सर्वे के दौरान हमने विभिन्न विकारों से ग्रस्त लोगों को फिजियोथैरेपी के वे उपाय भी बताए जिनका पालन करके वे इन विकारों से मुक्ति पा सकते हैं। डा. प्रेक्षा शर्मा ने बताया कि बहुत सी समस्याएं भौतिक चिकित्सा(फिजियोथैरेपी) से दूर की जा सकती हैं। ऐसा करने से दवाओं के प्रयोग से बचा जा सकता है। अगर किसी का दर्द किसी एक्सरसाइज से दूर हो सकता है तो पेन किलर लेने से बचा जा सकता है, जिसके अनेक दुष्प्रभाव होते हैं। 




उन्होंने बताया कि सर्वे का यह कार्य संस्कृति स्कूल आफ मेडिकल एंड एलाइड साइंसेज के फार्मेसी विभाग द्वारा जारी रखा जाएगा। इस सर्वे से अनेक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे और अनेक समस्याओं के समाधान का आसान रास्ता निकलेगा।


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