KYEF ने अधिकारों के कथित दुरुपयोग और संस्थान के कामकाज में हस्तक्षेप के लगाए आरोप; अकादमी में पढ़ाई, गुरबाणी और कीर्तन की गतिविधियां सामान्य
लोकल न्यूज ऑफ इंडिया
अमृतसर।मिरी पीरी अकादमी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के कुछ पदाधिकारियों पर लंबे समय से उत्पीड़न, अधिकारों के कथित दुरुपयोग और संस्थान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाते हुए अब सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग का दरवाजा खटखटाया है। अकादमी का संचालन करने वाली कुंडलिनी योग एजुकेशनल फाउंडेशन 3HO (KYEF) ने धारा 142 के तहत अपनी याचिका में संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका की जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई की मांग की है।
इस कानूनी लड़ाई के बीच अकादमी ने स्पष्ट किया है कि *मिरी पीरी अकादमी खुली है और उसका शैक्षणिक संचालन सामान्य रूप से जारी है।* गुरु की वडाली, छेहरटा स्थित परिसर में देश-विदेश के विद्यार्थी नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। गुरबाणी, कीर्तन और सिख जीवन मूल्यों से जुड़ी गतिविधियां भी पूर्ववत चल रही हैं।
KYEF ने अपनी याचिका में SGPC के कुछ पदाधिकारियों पर अधिकारों के दुरुपयोग, कर्तव्य में कथित लापरवाही, विश्वास भंग तथा संस्थान पर अनुचित दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए हैं। ये आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और इन पर आयोग का कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
संस्था के अनुसार, अकादमी से जुड़े उसके अधिकार पंजीकृत दस्तावेजों पर आधारित हैं। KYEF का कहना है कि संबंधित भूमि के लिए उसके पास 99 वर्ष की पंजीकृत लीज है, जिसकी अवधि वर्ष 2095 तक बताई गई है। संस्था का दावा है कि इसे किसी सक्षम अदालत अथवा प्राधिकरण द्वारा समाप्त नहीं किया गया है।
SGPC की ओर से इस व्यवस्था को समाप्त करने संबंधी नोटिस दिए जाने और धारा 142 के तहत आयोग के समक्ष कार्यवाही किए जाने की बात है। KYEF ने नोटिस की वैधानिकता को चुनौती देते हुए तर्क दिया है कि किसी पंजीकृत दीर्घकालिक व्यवस्था को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता।
KYEF ने आयोग से मामले की सुनवाई के दौरान अंतरिम संरक्षण की मांग भी की है। संस्था चाहती है कि अंतिम निर्णय होने तक अकादमी की वर्तमान स्थिति और उसके नियमित संचालन को प्रभावित करने वाला कोई कदम न उठाया जाए।
विवाद में सबसे गंभीर आरोप अकादमी के आंतरिक प्रबंधन में कथित हस्तक्षेप को लेकर हैं। KYEF का आरोप है कि एक ऐसे व्यक्ति को SGPC का सदस्य बताते हुए अकादमी के प्रबंधन में शामिल कराने का प्रयास किया गया, जिसे KYEF विधिवत SGPC सदस्य नहीं मानती। संस्था का दावा है कि इसके बाद अकादमी के आंतरिक रिकॉर्ड तक बाहरी लोगों की पहुंच बनी। KYEF का कहना है कि उसने इस संबंध में SGPC को लिखित शिकायत भी भेजी थी।
संस्था ने एक कानूनी नोटिस के औपचारिक रूप से जारी होने से पहले कथित रूप से बाहरी व्यक्तियों तक पहुंचने पर भी सवाल उठाया है। KYEF के मुताबिक, नोटिस की जानकारी अकादमी को औपचारिक रूप से मिलने से पहले ही ईमेल के जरिए स्कूल से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच गई थी। संस्था ने आयोग के समक्ष सवाल उठाया है कि SGPC से संबंधित कानूनी दस्तावेज आधिकारिक रूप से अकादमी तक पहुंचने से पहले अन्य व्यक्तियों के पास कैसे पहुंचा।
KYEF ने कुछ व्हाट्सऐप संदेशों का हवाला देते हुए दबाव और धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। संस्था का दावा है कि कथित तौर पर SGPC की ओर से काम करने की बात कहने वाले कुछ व्यक्तियों के संदेशों में अकादमी की भूमि तथा उसके बोर्ड के एक सदस्य को हटाने जैसी मांगों का उल्लेख था। एक अन्य संदेश में आंतरिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग किए जाने का दावा किया गया है।
इन संदेशों की प्रामाणिकता, पूरा संदर्भ और उनका कानूनी महत्व न्यायिक परीक्षण का विषय है। उपलब्ध प्रेस सामग्री के आधार पर इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है।
KYEF ने लगभग 2.5 एकड़ गैर-बाड़बंद हिस्से को लेकर भी गंभीर आरोप लगाया है। संस्था का दावा है कि SGPC से संबंधित बताई गई एक ‘टास्क फोर्स’ ने बिना किसी न्यायिक आदेश के इस हिस्से पर नियंत्रण कर लिया। KYEF ने आयोग से संबंधित हिस्से को वापस दिलाने की मांग की है। संस्था का यह भी दावा है कि इसके बावजूद उससे पूरा वार्षिक किराया लिया जाता रहा। इस आरोप पर भी अंतिम तथ्य न्यायिक प्रक्रिया में ही स्पष्ट होंगे।
KYEF ने आयोग से अकादमी के संबंध में SGPC के स्तर पर लिए गए फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड—बैठकों के कार्यवृत्त, उपस्थिति पत्रक, बैठक नोटिस और संबंधित प्रस्ताव—सुरक्षित रखने तथा जरूरत पड़ने पर प्रस्तुत कराने की मांग की है।
कानूनी स्तर पर KYEF ने SGPC की धारा 142 के तहत दाखिल कार्यवाही की विचारणीयता पर भी सवाल उठाया है। संस्था का तर्क है कि इस धारा का दायरा अधिनियम में निर्धारित श्रेणियों तक सीमित है और मौजूदा परिस्थितियों में उसके खिलाफ इस प्रावधान के इस्तेमाल की वैधानिकता की जांच आवश्यक है। इस तर्क को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार संबंधित न्यायिक आयोग के पास है।
इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच KYEF ने अकादमी के शैक्षणिक और धार्मिक-सांस्कृतिक योगदान को सामने रखा है। संस्था के अनुसार, मिरी पीरी अकादमी से अब तक एक हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। यहां विद्यार्थियों को सामान्य शिक्षा के साथ गुरबाणी, कीर्तन और सिख जीवन पद्धति से परिचित कराया जाता है। संस्था ने युवा अमेरिकी सिखों के ‘द चरदीकला जत्था’ का भी उल्लेख किया है, जो गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से सिख परंपरा के प्रसार से जुड़े रहे हैं।
KYEF के एक प्रवक्ता ने कहा कि संस्था को सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर पूरा भरोसा है। संस्था ने उम्मीद जताई है कि न्यायिक प्रक्रिया विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अकादमी के हितों की रक्षा करेगी।
फिलहाल पूरा मामला सिख गुरुद्वारा न्यायिक आयोग के समक्ष है। KYEF द्वारा SGPC और उसके कुछ पदाधिकारियों पर लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। SGPC का विस्तृत पक्ष उपलब्ध होने पर उसका प्रकाशन भी इस विवाद की पूरी तस्वीर सामने रखने के लिए आवश्यक होगा।

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