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जोगिंद्रनगर के बेटे ने एशिया में दौड़ाया तिरंगा




सावन बरवाल की रफ्तार ने रचा इतिहास, मैराथन में भारत को 44 साल बाद मिला पदक


पहाड़ की पगडंडियों से एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचा हिमाचल का सितारा


रघुबीर सिंह राणा 

लोकल न्यूज ऑफ इंडिया 

मंडी/जोगिंद्रनगर। कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके हौसलों में उड़ान होती है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के छोटे से क्षेत्र *जोगिंद्रनगर* के बेटे *सावन बरवाल* ने अपनी मेहनत, संघर्ष और अदम्य इच्छाशक्ति से इस कहावत को सच कर दिखाया है।  


एशियन गेम्स 2026 में पुरुष मैराथन स्पर्धा में सावन बरवाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए *रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया।* उनकी इस उपलब्धि ने न केवल भारत का मान बढ़ाया, बल्कि हिमाचल प्रदेश को भी अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।  


*42.195 किलोमीटर की इस कठिन दौड़* में सावन ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास और संयम का परिचय दिया। दुनिया के बेहतरीन धावकों के बीच उन्होंने अपनी गति, धैर्य और मानसिक मजबूती के दम पर दूसरा स्थान हासिल किया।  


*44 साल का इंतजार खत्म, मैराथन में भारत को गौरव* 


सावन बरवाल की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन स्पर्धा में भारत को लंबे अंतराल के बाद पदक मिला है। उन्होंने इतिहास के उस पन्ने पर अपना नाम दर्ज करा दिया है, जहां देश के चुनिंदा महान धावकों का नाम दर्ज है।  



 *सेना के अनुशासन ने बनाया चैंपियन*


भारतीय सेना में कार्यरत सावन बरवाल ने अनुशासन, कठोर प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास के बल पर यह मुकाम हासिल किया। पहाड़ी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पले-बढ़े सावन ने अपनी मेहनत से साबित किया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती।  


जोगिंद्रनगर की धरती से निकला यह खिलाड़ी आज पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।  



*मुख्यमंत्री सुक्खू ने दी बधाई*


मुख्यमंत्री *ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू* ने सावन बरवाल को बधाई देते हुए कहा कि उनकी कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण ने देश और हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने सावन के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।  


*मंडी में जश्न, हिमाचल को गर्व*


सावन बरवाल की ऐतिहासिक सफलता के बाद मंडी जिले और जोगिंद्रनगर क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लोगों ने इसे हिमाचल की खेल प्रतिभा की बड़ी जीत बताया है।  


आज जोगिंद्रनगर का यह बेटा सिर्फ एक पदक विजेता नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की उम्मीद बन गया है जो सपनों को मेहनत के रास्ते पूरा करना चाहते हैं।  

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