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आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप मैचों से पहले एचपीसीए ने इंद्रू नाग मंदिर में की पूजा अर्चना, सफल आयोजन के लिए मांगी मन्नत



लोकल न्यूज आफ इंडिया: 

धर्मशाला, 25 सितम्बर ( गौरव सूद ) : अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला में 7 अक्टूबर को आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप के मैचों का पहला मैच होना है। हिमाचल प्रदेश क्रिकेट स्टेडियम ने मौसम सामान्य रहें, इसको लेकर पीठासीन देवता इंद्रु नाग के खनियारा स्थित प्राचीन मंदिर में हवन औल यज्ञ कर भंडारे का आयोजन किया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में किसी भी बड़े आयोजन से पहले एचपीसीए धर्मशाला के पीठासीन देवता इंद्रुनाग मंदिर में पूजा अर्चना कर मौसम साफ रहने की मन्नत मांगती है। ऐसे में मौसम साफ रहे मंगलवार को एचपीसीए सचिव अवनीश परमार और अन्यों पदाधिकारियों के साथ खनियारा स्थित भगवान इंद्रूनाग की शरण में पहुंचे।  खास बात ये है कि धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनने के बाद पहली बार एचपीसीए 2005 में भगवान इंद्रूनाग के मंदिर पहुंची थी। जब भी कोई बड़ा मैच धर्मशाला स्टेडियम में होता है तो एचपीसीए विशेष रूप से यहां पूजा के लिए आती है।

मन्नत मांगी

पदाधिकारियों ने धर्मशाला में मैचों के सफल आयोजन की मन्नत मांगी। इंद्र देवता के गुरो चेलों भानी राम और सुरेश कुमार ने गुर खेल (खेलपात्र) डालकर प्राचीन अघंजर महादेव ,त्रेला देवता और खटासनी मंदिर में रविवार को हवन यज्ञ करने का आदेश दिया।

बारिश हुई तो 20 मिनट में सुख जाएगा ग्राउंड

स्टेडियम का निर्माण नई तकनीक से हुआ है। इससे बारिश के 20 मिनट बाद मैदान सूखकर खेलने के लिए तैयार हो जाएगा। आउट फील्ड सुखाने के लिए हाईटेक मशीनें हैं।

प्रैक्टिस एरिया तैयार

दोनों टीमों के खिलािड़यों का प्रैक्टिस एरिया तैयार हो गया है। यहां आंगुतकों के प्रवेश पर प्रतिबंध है। स्टेडियम के भीतर इंडोर स्टेडियम में खिलािड़यों के वार्मअप के लिए जिम और मशीनें हैं।

इंद्रू नाग को माना जाता है बारिश का देवता

मान्यता है कि इंद्रू नाग धौलाधार क्षेत्र का पीठासीन देवता है। इन्हें बारिश का देवता माना जाता है, जो भगवान इंद्र के साक्षात रूप हैं। प्रशासन भी किसी भी बड़े उत्सव से पहले यहां हाजिरी लगाता है। इंद्रू नाग देवता धौलाधार की तलहटी में बसे ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी आपदा से बचाव और समस्याओं के समाधान में भूमिका निभाता है। ग्रामीण भी इस देवता के हर आदेश का पालन करते हैं। 

हिंदू मुस्लिम एक साथ पूजा करते है

इंद्रू नाग की विशेषता यह है कि इस मंदिर पूजा अर्चना हिंदू पंडित करते हैं, लेकिन वाद्य यंत्र और शहनाई वादन का कार्य मुस्लिम परिवार करता आ रहा है।  यहां हिंदू-मुस्लिम एक साथ पूजा करते हैं।

भगवान श्री इंद्रु नाग मंदिर का इतिहास

खनियारा स्थित भगवान इंद्रु नाग मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। मान्यता है कि यहां वान पेड़ के नीचे भगवान के पदचिह्न मिले थे। उसके बाद यहां का एक राजा पहुंचा था। इसकी कोई संतान नहीं थी। भगवान इंद्रु नाग ने उसे सपने में दर्शन देकर संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था। राजा ने भगवान इंद्रु नाग की पूजा अर्चना की और उसके अगले साल वह अपने बेटे सहित पहुंचा। पूजा अर्चना करने के बाद भगवान का मंदिर बनवाने के साथ इस क्षेत्र की जमीन को मंदिर के नाम कर दिया।  इसके बाद से मंदिर में विशेष पूजा का दौर शुरू हुआ और यहां जो भी श्रद्धालु अपनी मन्नत लेकर आया उसकी हर मनोकामना भगवान ने पूरी की।

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